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किंग चार्ल्स की पहली पसंद मुंबई

किंग चार्ल्स की पहली पसंद "मुंबई"तीन वर्ष पहले प्रिंस चार्ल्स ने तीन दिन का यह भारत दौरा कामकाजी यात्रा के रूप में मनाया।

महारानी एलिजाबेथ के देहांत के बाद प्रिंस चार्ल्स किंग चार्ल्स के रूप में अब ब्रिटेन के महाराजाधिराज और राष्ट्रमंडल प्रम‌ुख हैं। उनसे पहले ब्रिटेन के तीन सम्राट या सम्राज्ञी मुंबई आ चुके हैं।

१४ नवंबर ब्रिटेन के महाराजाधिराज किंग चार्ल्स तृतीय का जन्मदिन है और भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का भी। नेहरूजी का जन्मदिन ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। तीन वर्ष पहले किंग चार्ल्स (उन दिनों प्रिंस चार्ल्स) इस दिन मुंबई में थे और उन्होंने अपना ७१वां जन्मदिन ‘बाल दिवस’ के रूप में बच्चों के साथ ही मनाया। कोलाबा के ताजमहल होटल में २० से अधिक स्कूल बच्चों की संगत में उन्होंने ‘हैपी बर्थडे’ के कोरस के साथ केक काटा। माहौल में रंग भरा विश्वविख्यात पॉप सिंगर केटी पैरी ने उनके स्वागत में एक विशेष गीत से।

तीन वर्ष पहले प्रिंस चार्ल्स ने तीन दिन का यह भारत दौरा कामकाजी यात्रा के रूप में मनाया। मुंबई यात्रा में ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट की एडवाइजरी कौंसिल के प्रमुख की हैसियत से जहां उन्होंने टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा से ग्लोबल वॉर्मिंग से उत्पन्न चुनौतियों के मुकाबला करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया वहीं मुकेश अंबानी, अदार पूनावाला और हर्ष गोयनका सहित देश के शीर्ष उद्योगपतियों से आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की।

ब्रिटेन के सम्राट और राष्ट्रमंडल के प्रमुख के रूप में किंग चार्ल्स की पहली भारत यात्रा की प्रतीक्षा अभी बनी है, हालांकि ड्यूक ऑफ कॉर्निवाल प्रिंस चार्ल्स के रूप में वे १० बार भारत आ चुके हैं। इनमें कई बार मुंबई भी, जिससे अपना विशेष लगाव वे कई बार जाहिर कर चुके हैं। किंग चार्ल्स की मां महारानी एलिजाबेथ द्वितीय पति ड्यूक ऑफ एडिनबरा प्रिंस फिलिप के साथ १९६१, १९८३ और १९९७ की भारत यात्राओं के दौरान मुंबई आ चुकी हैं। १९६१ की मुंबई यात्रा में मरीन ड्रॉइव और ताजमहल होटल के सामने सैर के दौरान लाखों लोगों ने उनके दीदार किए। अपने पूर्वजों की तरह महारानी एलिजाबेथ ने भी अपोलो बंदर से लांच में समुद्र यात्रा की-ट्रांबे में परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान के निरीक्षण के लिए। दिवंगत महारानी की तरह मुंबई प्रिंस चार्ल्स के पुत्र प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी प्रिंसेज केट की भी यादों में है। राजघराने के लॉर्ड माउंटबेटन जब स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल बने तब स्वतंत्रता के तीसरे ही दिन ताजमहल होटल में देश के उद्योगपतियों की पहली बैठक को संबोधित किया। ।

ब्रिटिश राजघराने के सदस्यों की बार-बार की मुंबई यात्राओं से प्रकट है कि देश की स्वतंत्रता की इस राजधानी से आजादी के ७५ वर्ष बाद भी उसका अनुराग का रिश्ता बना हुआ है। फोर्ट की ब्रिटानिया एंड कंपनी में महारानी का फोटो महात्मा गांधी के फोटो के साथ टंगा है। इस वैâफे सहित तकरीबन हर पारसी संस्थान और घरों में क्वीन विक्टोरिया और क्वीन एलिजाबेथ को आप प्रतिमा या फोटोप्रâेम में मौजूद देख लेंगे। मुंबई के विश्वविख्यात डिब्बावालों का किंग चार्ल्स से नेह का संबंध कोई छिपी बात नहीं है, जिनसे वे २००३ की मुंबई यात्रा में मिले थे। डिब्बावालों को उन्होंने २००५ में वैâमिला पार्कर बाउल्स से अपनी दूसरी शादी की पार्टी में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा। डिब्बावालों ने दूल्हे को एक शानदार कुर्ता लहंगा और दूल्हन को नौ गज की सुंदर पैठणी साड़ी भेंट की। मुंबई के एक फिल्म स्टूडियो में पद्मिनी कोल्हापुरे ने उन्हें सरेआम किस कर दुनिया भर में सनसनी फैला दी।

ट्रेन में शाही सवारी
गेटवे ऑफ ‌इंडिया मुंबई में आज जिस जगह है, वहां पहले अपोलो बंदर हुआ करता था। अपोलो बंदर को इंग्लैंड के सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मेरी और किंग एडवर्ड सप्तम के साथ ड्यूक ऑल एडिनबरा और प्रिंस ऑफ वेल्स की अगवानी का भी गौरव हासिल है। १८७५-७६ में प्रिंस आफ वेल्स (बाद में सम्राट एडवर्ड सप्तम) जब सबसे पहले भारत यात्रा पर आए तब भारतीय रेल अपने शुरुआती दौर में थी। प्रिंस आफ वेल्स इंग्लैंड से जहाज से आकर मुंबई के अपोलो बंदर पर उतरे तो जीआईपी रेलवे (तत्कालीन मध्य रेल) की ट्रेन से ही पुणे आए-गए। इससे पहले शाही दंपति ब्रिटिश राजपरिवार ड्यूक ऑल एडिनबरा (१८७०) और इसके बाद प्रिंस ऑफ वेल्स (१९०५) भी जब मुंबई आए, तब राजसी ट्रेन ही उनकी भारत यात्रा का जरिया बनी। दिसंबर, १९११ में हुए ‘दिल्ली दरबार’ के सिलसिले में प्रिंस ऑफ वेल्स दोबारा इंग्लैंड के सम्राट जॉर्ज पंचम के रूप में मुंबई आए तो साथ में महारानी मेरी को भी साथ लाए। इस बार भी उन्होंने ट्रेन की ही सवारी की। महारानी एलिजाबेथ प्रिंस फिलिप के साथ १९६१ में मुंबई आर्इं तो वे भी इस यात्रा में रेलवे के कार्यक्रमों में भी भागीदार बनीं ,लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।



Posted By:Surendra






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