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शैक्षिक आगाज़ द्वारा तोतोचान पुस्तक की स्टेट लेवल समीक्षा का आयोजन सम्पन्न

 

ग्वालियर/ शैक्षिक आगाज़ द्वारा हर किताब कुछ कहती है कार्यक्रम के अंतर्गत एक शैक्षिक पुस्तक तोतोचान  की मध्यप्रदेश स्तर की ऑनलाइन समीक्षा आयोजित की गयी । स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. दीप्ति गौड़ ने बताया तोतोचान जापानी साहित्य की एक अप्रतिम रचना है। जिसमें लेखिका तेत्सुको कुरोयानागी ने अपने मूल जीवन की सच्ची घटना पर आधारित देशकाल व वातावरण का यथार्थ रूप उजागर किया है। पुस्तक का हिन्दी अनुवाद पूर्वा याज्ञिक कुशवाह ने किया है जिसे नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया ने प्रकाशित किया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री के पी तिवारी जिला शिक्षा अधिकारी रीवा, विशिष्ट अतिथि श्री आकाश सारस्वत डिप्टी डायरेक्टर प्रोजेक्ट समग्र शिक्षा अभियान उत्तराखंड,  कार्यक्रम संयोजक डॉ. दीप्ति गौड़, श्रीमती स्मृति चौधरी संस्थापक शैक्षिक आगाज़, श्री एस एन शर्मा नेशनल गाइड सहित पुस्तक  समीक्षक शिक्षाविद डॉ. प्रमिला सिंह सतना, श्रीमती शोभा कंवर, डॉ. अखिलेश सिंह भदोरिया रीवा, डॉ. दशरथ मसानिया आगर मालवा, डॉ. अंजली सिंह अनूपपुर सम्मिलित होकर अपने विचार व्यक्त किए ।  
मुख्य अतिथि के रूप में श्री के पी तिवारी ने कहा कि सतत विकास के लिए जरूरी है कि लैंगिक भेदभाव नहीं होना चाहिए और बच्चों की झिझक दूर करने के तरीके ढूंढने चाहिए । 
विशिष्ट अतिथि श्री आकाश सारस्वत ने कहा कि शिक्षकों में बहुत ऊर्जा है । शिक्षक दशा और दिशा दोनों बदल सकता है अधिकारी शिक्षक के कंधे पर हाथ रखने वाले होने चाहिए।
प्राचार्य डॉ प्रमिला सिंह ने कहा इसमें प्रकृतिवाद की झलक है। बच्चों को रटा रटाया ज्ञान के बजाय सार्थक ज्ञान देना चाहिए ।
डॉ. अखिलेश सिंह भदोरिया ने कहा शिक्षक (कोबायाशी ) के द्वारा विद्यालय में भयमुक्त वातावरण का निर्माण, प्रकृति और बच्चों से अथाह प्रेम, बच्चों को उनकी जिज्ञासा पूर्ति हेतु पर्याप्त अवसर देने आदि से पुस्तक की गुणवत्ता बढ़ जाती है।
डॉ.अंजली सिंह ने कहा यह पुस्तक केवल पुस्तक नहीं अपितु बचपन की पूरी अवधारणा का एक मौलिक एहसास है |शोभा कँवर ने कहा उचित समर्थन और प्रोत्साहन से हर बच्चा सीख सकता है। डॉ दशरथ मसानिया ने कहा बच्चो के बीच शिक्षण में रोचकता लाना चाहिए । यह सब तभी स़भव होगा जब शिक्षक ज्ञान एवं ऊर्जा से भरा हुआ हो । श्री एस एन शर्मा ने कहा बच्चों मे शारीरिक श्रम ब समाजोपयोगी उत्पादक कार्य करने की क्षमता विद्यालय मे ही विकसित की जानी चाहिए।
श्रीमती स्मृति चौधरी ने कहा यह पुस्तक महत्वपूर्ण इस लिए है ,क्योंकि इसका पाठन बच्चों से बेहतर शिक्षकों के लिए है ।



Posted By:ADMIN






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