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सही विधि से योग करने पर मिलेगा लाभ - ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी


भारत स्वाभिमान द्वारा आयोजित 28 दिवसीय राज्य स्तरीय सह योग प्रशिक्षण शिविर का आज 16वां दिन
दीदी ने प्रायोगिक योग सत्र का ऑनलाइन संचालन किया व विशेष योगनिद्रा का कराया अभ्यास


बिलासपुर टिकरापारा :- ‘‘योग आसन प्राणायाम करने वाले प्रारंभिक साधकों को योग का अभ्यास किसी अनुभवी प्रषिक्षक के सानिध्य में करना चाहिए नहीं तो हम बहुत समय से योग तो करते हैं परन्तु विधि सही न होने के कारण हमें लाभ प्राप्त नहीं होता। सही विधि के साथ सकारात्मक विचारों के साथ योग करना चाहिए। आसन-प्राणायाम तन को स्वस्थ रखता है वहीं सकारात्मक विचार मन व बुद्धि को दुरूस्त करता है।’’
उक्त बातें भारत स्वाभिमान न्यास द्वारा आयोजित 28 दिवसीय राज्य स्तरीय सह योग प्रशिक्षण कार्यक्रम के 16वें दिन ऑनलाइन प्रायोगिक योगाभ्यास कराते हुए ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही। आपने सभी को समयबद्ध व क्रमबद्ध तरीके से आठों प्राणायाम, कुछ सूक्ष्मअभ्यास व अन्य आसनों के अभ्यास कराए। व साथ ही यह भी बताया कि आसनों का अभ्यास करने के तुरंत बाद बढ़ी हुई श्वांस की गति में प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए। पहले श्वांसों की गति को सामान्य करें फिर अगले अभ्यास की ओर आगे बढ़ें।
मानसिक शांति व मन की थकान दूर करने के लिए करें योगनिद्रा का अभ्यास...
दो घण्टे के सत्र में आसन-प्राणायाम के बाद दीदी ने सभी को योगनिद्रा अर्थात् रिलैक्सेशन मेडिटेशन का अभ्यास कराया और कहा कि योगनिद्रा में लिया गया संकल्प अवश्य पूरा होता है अतः किसी श्रेष्ठ लक्ष्य के लिए संकल्पित होकर योगनिद्रा का अभ्यास करें। यदि हम सही तरीके से इसका अभ्यास करते हैं तो हमारी आठ घण्टे की थकान दूर हो जाती है। गूगल मीट व फेसबुक लाइव के माध्यम से जुड़े प्रशिक्षार्थियों ने इस सत्र का लाभ लिया। योग प्रदर्शन के लिए मास्टर ट्रेनर राकेश गुप्ता एवं कु. रानी दीपाली गंगोत्री मंजू दीदी जी के साथ उपस्थित रहे।

प्रेस-विज्ञप्ति 2
एकाग्रता व स्थिरता की अद्भूत मिसाल चैतन्य झांकी
टिकरापारा व राजकिषोरनगर में लगी चैतन्य झांकी का आज योग साधना के साथ हुआ समापन

‘‘टिकरापारा एवं राजकिषोर नगर के सेवाकेन्द्र में लगाए गए चैतन्य देवी की झांकी का आज अंतिम दिन रहा। जिसमें बहनों ने राजयोग के अभ्यास से तन व मन की स्थिरता द्वारा एकाग्रता की अद्भूत मिसाल प्रस्तुत की। वे मेडिटेषन में शक्तिस्वरूपा स्थिति में स्थित हो परमात्मा शिव से शक्ति लेकर पूरे विष्व को सकाश देती हैं अर्थात् अपनी शुभभावनाओं व शुभकामनाओं के प्रकम्पन्न भेजती हैं। अंतिम दिन बहनों ने मां के सजे-सजाए रूप के समक्ष भजनों के भाव में जाते हुए ईष्वरीय स्मृति में बैठकर योग साधना की।’’



Posted By:Utpal Sengupta






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