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अपनी नई पुस्तक "कलयुग" की सफलता से बेहद उत्साहित हैं लेखक जतिन गुप्ता

जतिन गुप्ता की बेस्ट सेलर "कलयुग" पर बन सकती है बॉलीवुड फिल्म
आपको वास्तव में बेस्टसेलर्स में जगह  बनाने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर रिलीज़ की आवश्यकता नहीं है! यदि एक मोहक और उम्दा पुस्तक है, तो यह अपनी योग्यता से पाठकों के हाथो तक पहुंच जाएगी! यही कारण है कि कोई भी आगामी लेखक वर्तमान लोकप्रिय पुस्तक कलयुग : द असेंशन के लेखक जतिन गुप्ता से सीख सकता है। लेखक जतिन गुप्ता अपनी हालिया फिक्शन की किताब की सफलता से बेहद उत्साहित हैं। हालांकि उन्होंने गैर-फिक्शन से फिक्शन की ओर कदम बढ़ाया है।
मेगा लॉन्च इवेंट नहीं होने के बावजूद, यह पुस्तक हॉट केक की तरह बिक रही है। क्या आपने इस तरह की प्रतिक्रिया की आशा की थी? इस सवाल पर जतिन गुप्ता कहते हैं "हमने कलियुग की 2500 प्रतियां एक महीने में बेचीं और यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। वह भी तब जब यह साल के अंत में स्टॉल पे आई थी; उस समय जब लोग ज्यादातर छुट्टियां मना रहे होते हैं या परिवार के साथ व्यस्त होते हैं, इस पुस्तक ने रिकॉर्ड बनाए। क्या मुझे ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद थी? सच कहूँ तो, हाँ, जब मैं इस कहानी को विकसित कर रहा था तो किताब ऐसी निकली जैसी मैंने पहले कभी नहीं पढ़ी हो और हर बार जब मैंने इसे पढ़ा तो मुझे लगा कि हमारे हाथ में कुछ खास है।"
पुस्तक के मोशन पोस्टर को भी सनसनीखेज प्रतिक्रिया मिली है। ये कैसे हुआ? इस बारे में जतिन गुप्ता ने बताया "हम पुस्तक को अलग तरीके से देखना चाहते थे और जब यह प्रकाशन प्रक्रिया में थी, हमने पुस्तक के कई पात्रों और दृश्यों को एक आयाम देने का साहसिक निर्णय लिया। हमने रेखाचित्रों का उपयोग किया और उन्हें 8 मोशन पोस्टर और ट्रेलर में परिवर्तित किया। दिलचस्प बात यह है कि विजुअल्स ने शानदार प्रभाव उत्पन्न किया, जिसके कारण फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 2 मिलियन से ज़्यादा व्यूज, 2500 शेयर और 25000 रिएक्शन सामने आ गए।"
किताब कलियुग के बारे में जतिन गुप्ता ने बताया कि जैसा कि नाम से ही पता चलता है यह किताब कलयुग के बारे में है। कलियुग हमारे लिए क्या है और यह कैसे होगा, इस पर एक कल्पना है। कई अन्य कहानियों के विपरीत यह कहानी बिल्कुल पौराणिक नहीं है, बल्कि इसमें कहीं फैंटेसी भी है और पौराणिक कथाओं से बहुत कम तत्व हैं।"
नॉन फिक्शन के साथ एक लेखक के रूप में डेब्यू करने से लेकर हाल की फिक्शन रिलीज़ तक, दोनों के लेखन में क्या अंतर था? इस पर जतिन गुप्ता कहते हैं "सेल्फ हेल्प और मैनेजमेंट बुक्स वास्तविक्ता पे आधारित होती है और इसमें कांसेप्ट के इर्दगिर्द खेलने की गुंजाइश बहुत कम होती है। हालांकि फिक्शन के मामले में ऐसा नहीं है, यह एक अनंत कैनवास है जहां आपकी कल्पना सीमा से आगे तक जा सकती है। व्यक्तिगत रूप से, मुझे काल्पनिक लेखन पसंद है क्योंकि मैं अपने दिमाग में वास्तव में दुनिया का निर्माण कर सकता हूं, तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं आसानी से शैलियों को बदल सकता हूं और ऐसा मेरे पेशेवर पृष्ठभूमि के कारण हो सकता है।"
जतिन गुप्ता फिलहाल GVC नामक एक वैश्विक गेमिंग कंपनी के साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले वह इनवेसको नामक एक एसेट मैनेजमेंट कम्पनी के साथ काम कर रहे थे, उनके पेशेवर जीवन का प्रमुख हिस्सा मैनेजमेंट कंसल्टिंग और मार्केटिंग
में गुजरा है।
कहा जा रहा है कि यह किताब एक फिल्म के लिए एकदम सही मेटेरियल है, जतिन गुप्ता चाहते हैं कि जिस तरह बड़े पैमाने पर किताब को लिखा गया है उसी तरह कहानी के साथ न्याय करने के लिए भी बड़े स्तर पर फिल्म को बनाना होगा।



Posted By:ADMIN






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