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बीजेपी के इस केंद्रीय मंत्री के चलते भारत के झंडे के नीचे नहीं खेल पा रहे भारतीय तीरंदाज!

28 नवंबर को खत्म हुई एशियन आर्चरी चैंपियनशिप में भारतीय तीरंदाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया. तीरंदाजों ने इस इवेंट में एक गोल्ड, दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज़ मेडल्स जीते. इसके साथ ही दीपिका कुमारी ने इस टूर्नामेंट के आखिरी दिन हुए एशियन कॉन्टिनेंटल क्वॉलिफिकेशन इवेंट का गोल्ड मेडल भी जीता. इस गोल्ड के साथ ही उन्होंने भारत को टोक्यो 2020 ओलंपिक के लिए एक कोटा भी दिलाया.

हालांकि जब आप इन रिकॉर्ड्स को ऑफिशियली देखेंगे तो वहां आपको भारत का झंडा नहीं दिखेगा. क्यों नहीं दिखेगा? क्योंकि इस टूर्नामेंट में खेले भारत के सारे तीरंदाज न्यूट्रल एथलीट की तरह खेले थे. ऐसा क्यों हुआ जानते हैं.

# पावर का गेम

हमारे गांवों में एक कहावत कही जाती है, ज्यादा जोगी… मठ उजाड़. यही हाल है हमारे देश की तीरंदाजी असोसिएशन का. जोगी ज्यादा हो गए हैं और मठ को उजाड़ कर अब इधर-उधर भिक्षाम् देहि-भिक्षाम् देहि कर रहे हैं.

मामला यह है कि आर्चरी असोसिएशन ऑफ इंडिया में दो गुट हैं- अर्जुन मुंडा और BVP राव. अर्जुन मुंडा बीजेपी के बड़े नेता हैं, झारखंड के चीफ मिनिस्टर रह चुके हैं. अभी वह केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. जबकि राव असम कैडर के पूर्व IAS. इसी साल 9 जून को दोनों गुटों ने दिल्ली और चंडीगढ़ में अपने-अपने पर्सनल इलेक्शन कराए. यहां मुंडा के पास 20 स्टेट असोसिएशन का सपोर्ट था, जबकि राव के पास 10 का. इन्होंने इन सबको एक कर एकसाथ चुनाव कराने की जगह इनके साथ मिलकर अलग-अलग जगह चुनाव करा लिए.

इन चुनावों में वही हुआ जो फिक्स मैच में होता है. मुंडा और राव अपनी-अपनी AAI के प्रेसिडेंट या, रामाधीर सिंह के शब्दों में कहें तो अपनी-अपनी पिच्चर के हीरो बन गए. लेकिन जैसे पिच्चर का भाग्य फैंस तय करते हैं वैसे यहां इनका भाग्य वर्ल्ड आर्चरी को तय करना था. तो भैया, दुनियाभर की तीरंदाजी को चलाने वाली संस्था वर्ल्ड आर्चरी ने भारत को अपनी समस्याएं सुलझाने के लिए जुलाई के अंत तक का वक्त दिया.

# बर्बाद करने की जिद

ऐसा नहीं है कि वर्ल्ड आर्चरी ने इन दोनों गुटों को एक करने की कोशिश नहीं की थी. इन्होंने अपने यहां से काज़ी राजिब उद्दीन अहमद चापोल को भारत भेजा था. बांग्लादेश और आर्चरी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी चापोल साब इनके चुनावों नजर रखने और दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने आए थे. लेकिन ये लोग फिर भी नहीं माने. इस एक कुर्सी के ये दो दीवाने पीछे हटने को तैयार ही नहीं हुए. फिर 8 अगस्त 2019 को वर्ल्ड आर्चरी ने भारत को सस्पेंड कर दिया.

सस्पेंशन के बाद भी ये पावर के भूखे लोग झुकने को नहीं तैयार हैं. इनके हठ के चलते भारतीय तीरंदाज लगातार पूरी दुनिया में शर्मसार हो रहे हैं. लेकिन ये हैं मानते ही नहीं. इस सस्पेंशन के चलते भारतीय तीरंदाज जब किसी भी इंटरनेशनल इवेंट में गोल्ड मेडल जीतते हैं तो ना तो वहां तिरंगा होता है और ना ही राष्ट्रगान की धुन बजती है. सोचिए, जब एशियन चैंपियनशिप में ज्योति सुरेखा वेन्नम और अभिषेक वर्मा की जोड़ी ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम का गोल्ड जीता होगा. और इस जीत के बाद जब ना तो वहां तिरंगा दिखा होगा और ना ही राष्ट्रगान की धुन बजी होगी तो उन्हें कैसा लगा होगा?

# तीरंदाजों का नुकसान

ख़ैर ये तो राष्ट्रवादी बात हो गई, इसे खेल में मिक्स नहीं करते हैं. दिसंबर 2019 में नेपाल में साउथ एशियन गेम्स होने हैं. लेकिन भारतीय तीरंदाज उसमें नहीं खेलेंगे, क्योंकि उनकी असोसिएशन सस्पेंड है. साउथ एशियन आर्चरी फेडरेशन (SAAF) इसी महीने हुई एक मीटिंग में भारतीय तीरंदाजों को परमिट देने से साफ इनकार कर दिया.

इससे पहले अक्टूबर में एशियन पैरा आर्चरी चैंपियनशिप हुई थी. वहां विवेक चिकारा ने चाइना के सिजुन वांग को 7-1 से हराकर गोल्ड मेडल जीता था. लेकिन इससे भारत को कुछ नहीं मिला क्योंकि वह वर्ल्ड आर्चरी के झंडे के नीचे खेले थे. इतना ही नहीं इस जीत के बाद उन्हें मिला टोक्यो पैरालंपिक गेम्स का कोटा भी भारत के हिस्से नहीं आया.



Posted By:ADMIN






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