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कार्तिक सूद एकादशी मतलब की देव दिवाली

देव दिवाली

कार्तिक सूद एकादशी मतलब की  देव दिवाली ! नए साल की पहेली ग्यारस मतलब की देवत्थान की एकादशी लोग जिसको देव उठी ग्यारस बोलते है वह प्रबोधिनी एकादशी ! ईस दिन चातुर्मास पूर्ण होता है । मतलब की बारिश का मास पूर्ण होते है । ज्येठ सूद ग्यारसी को देवशयनी को देवपोढी  ग्यारषि कहा जाता है । इस ग्यारषि से चातुर्मास सुरु होता है और तब देवपौढ़ जाते है । इसिलिए इन साडे चार मास तक विवाह या फिर कोई भी रिश्ता ओर कोई भी मांगलिक कार्य नही हो सकता था । जैन धर्म मे सारे मुनिओ इस चातुर्मास के बाद कहि भी विचरण नही करते हुए किसी एक जी स्थान ग्रहण कर इस  चातुर्मास व्यतीत करते है । इस साडे चार मास बाद आने वाली ग्यारषि का व्रत भी लोग रखते है । जिन लोगो पूरे साल की ग्यारसी न कर सके वह इन साडे चार मास की ग्यारसी करते है । इसके पीछे भी बहुत बड़ा कारण है इन साडे चार मास बारिस ओर ओषयुक्त मौसम रहते है । इसके बाद ग्यारषि का उपवास करने से तंदुरस्ती बनी रहती है । ईससे भी हमारे सभी व्रत तार्किक होते है ।
कार्तिक सूद ग्यारसी मतलब की देवोत्थान की ग्यारषि को चातुर्मास पूर्ण होते है और इस दिन तुलसीजी का विवस भगवान श्री कृष्ण के साथ होता है । और सभी देव इस दिन को दीपावली मनाकर उसके बाद विवाह सगाई या कोई भी रिश्ता मांगलिक प्रसंग को किया जाता है । जिससे कि देव दिपावली के बाद से मनुष्य का विवाह और अन्य कोई भी मांगलिक कार्य का मुहुर्त निकलवाते है । हमारी संस्कृति और परंपरा तो देखिए पहले तुलसी विवाह और उसके बाद ही किसी मनुष्य का विवाह अवसर होता है । और प्रथम मानव दीपावली उत्सव ओर उसके बाद किसी भी उच्चत्तर सोपान ओर स्वर्गीय माहौल प्रकट करती देवोत्थान की ग्यारषि - देव दिवाली वृंदा का पानी ग्रहण का प्रसंग ! इन सभी परंपराए अत्यंत रोमांचक और साइंटिफिक है ! विवाह उत्सुक युगल को देव दिवाली की चतक नजर की राह देखते है । तुलसी का पौधा का निरीक्षण किया जाता है । तब ख्याल आता है कि तुलसी का पौधा ऐसे ही बिना फल होता है । उसमें फल नही आते की न तो फूल आते है किंतु फल फूल के बाद पूरा तुलसी का पौधा सम्पूर्ण गुणकारी होता है ।

 



Reported By:Mayuri Makwana
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