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भविष्य की गोद में क्या छिपा है

जब हम ज्योतिष शब्द सुनते हैं  तो सबसे पहले हमारे दिमाग में एक सवाल उठता है कि ज्योतिष क्या है? मानव का स्वभाव ही कुछ ऐसा है कि वह जानना चाहता है। क्यों ? कैसे ? और क्या? सब सवालों का जवाब जानने पर व्यक्ति की उत्कंठा शांत होती है। ज्योतिष एक शक्तिशाली, आकर्षक, भविष्यसूचक विषय है जो कि अविश्वसनीय बातों पर दुनियाभर का ध्यान आकर्षित करता है।

ज्योतिष क्या है?

सरल शब्दों में समझे तो “ग्रहों का ज्ञान कराने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा गया है। शास्त्रों में ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा गया है। व्याकरण वेद के कान हैं। कल्प वेद के हाथ हैं और छंद वेद के दोनों चरण है।‘

भविष्य की गोद में क्या छिपा है इसके बारे में जानने की उत्कंठा और भविष्य पर अपना अधिकार करने की प्रेरणा से ही ज्योतिष और ज्योतिष के अन्य अंग इतने लोकप्रिय हो गए हैं।

वेद के कुल छः अंग है ।

(1) ज्योतिष

(2) व्याकरण

(3) शिक्षा

(4) निरुक्त

(5) कल्प

(6) छेद

इन छः अंगों में ‘ज्योतिषं वेद चक्षुरस्तु’ अर्थात् ऐसा कहा गया है कि ज्योतिष उस वेद का नेत्र है । व्याकरण उन वेदों का कान है । कल्प उन वेदों का हाथ है और छंद को दोनों चरण कहा गया है ।

ज्योतः शास्त्रन्तु यो वेद सयाति परमां गतिम् – ज्योतिष शास्त्र को जाननेवाला ईश्वर को पाकर परमगति अर्थात् मोक्ष की प्राप्ति करता है । भारतीय संस्कृति की आत्मा को समझने के लिए वेदों का अध्ययन मनन और चिंतन परम आवश्यक है। ज्योतिष शास्त्र के १८ महर्षि प्रवर्तक या संस्थापक के रूप में जाने जाते है।

ॠषि कश्यप के मतानुसार इनके नाम क्रमश:

1. सूर्य

2. पितामह

3. व्यास

4. वशिष्ट

5. अत्रि

6. पाराशर

7. कश्यप

8. नारद

9. गर्ग

10. मरीचि

11. मनु

12. अंगिरा

13. लोमश

14. पौलिश

15. च्यवन

16. यवन

17. भृगु

18. शौनक

है। हम सभी के जीवन की घटनायें ग्रहों की गतिविधियों के द्वारा संचालित होती है।

ज्योतिष स्वयं को और भविष्य को जानने के लिए ज्ञान की एक कुंजी है। आज ज्योतिष की मुख्य रूप से दो प्रणालियों और तरीकों से ज्योतिष किया जाता है। पूर्वी ज्योतिष प्रणाली जो भारतीय या वैदिक ज्योतिष के रूप में प्रचलित है। और पश्चिमी ज्योतिष प्रणाली। ज्योतिष की दोनों प्रणाली अपने अपने तरीकों में विश्वसनीय और प्रासंगिक है। लेकिन, इनकी गणना और व्याख्या में बुनियादी अंतर है।

पश्चिमी या सायन ज्योतिष के सिद्धांत मोटे तौर पर सौर कुण्डली पर आधारित हैं। दूसरी ओर, पूर्वी / वैदिक ज्योतिष चन्द्रमा पर आधारित है। हम यहां आपको जिस ज्योतिष को समझाने जा रहे है। वह चन्द्र आधारित है।

 

ज्योतिषां सूर्यादि ग्रहणां बोधकम् शास्त्रं यानि “सूर्य और अन्य ग्रहों के साथ भविष्य का ज्ञान देनेवाला शास्त्र अर्थात ज्योतिष” ‘ज्योतिष’ शब्द का संधि विच्छेद करें तो वह होता है ज्योत + ईश, अर्थात्, ईश्वर की रोशनी। ज्योतिष का कार्य प्रकाश देना है, अर्थात् ईश्वर की संयोजना पर प्रकाश डालनेवाला शास्त्र मतलब ‘ज्योतिष’ शास्त्र है।

किसी भी व्यक्ति, राष्ट्र, घटना या किसी प्रकार की समस्या का जिस समय जन्म होता है, उस समय आकाश में स्थित ग्रहों की स्थिति के आधार पर उस व्यक्ति या घटना का भविष्य बताया जा सकता है। इसके लिए निश्चित नियम हैं, उन नियमों को व्यावहारिक होकर अपने विवेक बुद्धि का उपयोग करके ज्योतिषी अर्थात् भविष्यवेत्ता भविष्य दर्शन करा सकता है।

अब सवाल यह उठता है कि आज ज्योतिष इतना उपयोगी क्यों हो गया है? ज्योतिष शास्त्र का सही और वैज्ञानिक उपयोग सुखी सामाजिक व्यवस्था बनाने के लिए किया जा सकता है। आज थेलेसेमीया से पीड़ित दो व्यक्तियों के बीच वैवाहिक संबंध होने से जन्म लेने वाली संतान थेलेसेमीया माइनर से ग्रसित हो सकती है, ऐसा चिकित्सा – विज्ञान कह सकता है ।

वैसे ही कुंड़ली मिलाने करने वाला ज्योतिषी भी मध्य नाड़ी दोष देखकर संतान का भविष्य बता सकता है। ज्योतिष का विस्तृत और वैज्ञानिक उपयोग करने से जीवनस्तर उच्चतर बनाया जा सकता है। सबसे अधिक शक्तिशाली है, काल अर्थात् समय- जो राजा को रंक और रंक को राजा बना सकता है। यहां यह भी समझना उपयोगी होगा की ज्योतिष शास्त्र पूर्णत: विज्ञान है। जो ग्रहों की गति के आधार पर हर बात का भविष्यकथन करता है। इस शस्त्र द्वारा आप अन्य व्यक्तियों के स्वभाव को जानकर उसके अनुरूप व्यवहार कर सकते हैं। उसी प्रकार आप भविष्य में घटने वाली अच्छी या बुरी घटनाओं के बारे में दूरदर्शिता अपना सकते हैं।

ज्योतिष शास्त्र यदि विचारशील, व्यापक, ज्ञान- संपन्न, उदार, विवेकशील तथा अनुभवी व्यक्ति और सभी का कल्याण कर सकता है।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715, 9811598848

rekhakalpdev@gmail.com

ज्योतिष आचार्या रेखाकल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है। कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं।

आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिकाओं में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं।

जीवन की स्थिति, आय, करियर, नौकरी, प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, व्यापार, विदेशी यात्रा, ऋणऔर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, धन, बच्चे, शिक्षा,विवाह, कानूनी विवाद, धार्मिक मान्यताओं और सर्जरी सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को फलादेश के माध्यम से हल करने में विशेषज्ञता रखती हैं।

 



Posted By:Acharya Rekha Kalpdev






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