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भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण की कुंडलियों की तुलना – दोनों में कौन श्रेष्ठ

भगवान राम का जीवन और शिक्षाएं

भगवान राम हम सभी के ह्द्रय में एक आदर्श महापुरुष के रुप में वास करते है। उनकी छवि एक आज्ञाकारी पुत्र, एक जिम्मेदार पिता, स्नेही पति, सह्रदय भाई और अति प्रतापी राजा की रही है। विभिषण से उनकी मित्रता गहरी रही। जीवन में उनका प्रत्येक चरित्र अनुकरणीय और सराहनीय रहा।

भगवान राम अपने गुणों के लिए जाने जाते हैं। इनका संपूर्ण जीवन शैक्षिक है। भगवान राम श्रीविष्णु जी के सातवें अवतार कहे जाते है। एक आदर्श पुरुष के उदाहरण स्वरुप उन्हें याद किया जाता है।

भगवान राम का जन्म त्रेता युग में हुआ और भगवान राम ने काल्पनिकता से परे यथार्थ और संघर्षमय जीवन व्यतीत किया। वे एक संयमित, मर्यादित और संस्कारित व्यक्तित्व के स्वामी थे।

भगवान राम का चरित्र जनमानस को शांति और आदर्श का मार्ग दिखाता है। उनके जीवन से हम मर्यादा, त्याग, प्रेम और लोकव्यवहार सिख सकते है। यह वह नाम है जो अपने नाम मात्र के स्मरण से अपने भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। राम शब्द की महिमा अद्भुत और अपरम्पार है।

भगवान राम नीति कुशलता और न्याय प्रिय के परम आदर्श बनें। वेदों के अनुसार मर्यादा का पालन इन्होंने किया। सत्य और वचन पालन के लिए सुखों का त्याग किया। सहनशीलता और धैर्य का गुण इनसे अधिक अन्य किसी में नहीं देखा गया। इनके आदर्श जीवन की व्याख्या इनकी कुंडली भी करती हैं। आईये देखें-

भगवान राम की कुंडली

भगवान राम की कुंडली कर्क लग्न और कर्क राशि की है। इनकी कुंडली में चंद्र-गुरु लग्न भाव में स्थित है। राहु तीसरे भाव, शनि चतुर्थ, मंगल सप्तम, शुक्र और केतु नवम, सूर्य दशम एवं बुध एकादश भाव में स्थित है।

भगवान श्रीराम का जन्म राघवेंद्र थे। इनका जन्म अयोध्या में, भगवान राम चक्रवर्ती सम्राट बनें। सूर्यवंश में जन्म लेने के कारण इन्हें सूर्यवंशी काहा जाता है। शास्त्रों में इनके जन्म समय के विषय में उल्लेख है कि इनका जन्म चैत्र माह, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि में अपराह्न काल में 12 बजे अभिजीत मुहूर्त काल में हुआ।

भगवान राम की कुंडली में सूर्य उच्च अवस्था में था। भगवान राम एक पत्नी व्रत और अपने वचन के लिए जाने जाते हैं। लग्न में गुरु-चंद्र की स्थिति इन्हें उच्च कुल का दर्शा रही है। पंचमेश मंगल ने इन्हें पराक्रमी संतान का पिता बनाया।

भगवान श्रीकॄष्ण का जीवन और शिक्षाएं

भगवान श्रीकॄष्ण सोलह कलाओं के स्वामी रहें। छल-कपट, चोरी, झूठ बोलकर न्याय धर्म की रक्षा करना, प्रेम प्रवंचना, ईर्ष्या सभी गुणों से व्यापत थे। सर्वकला संपन्न उन्हें कहा जा सकता है।

भगवान श्रीकॄष्ण का जन्म यदुवंश में हुआ। जन्म स्थान वॄंदावन था। और द्वारका में नगरी बसाने के कारण द्वारकाधीश की उपाधि से सम्मानित हुए। कोई उन्हें मथुरा का राजा कहता है और कोई उन्हें द्वारकाधीश कहता है।

भगवान श्रीकॄष्ण की कुंडली

भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली वृषभ लग्न और वृषभ राशि की है। सूर्य स्वराशि के चतुर्थ भावस्थ है। बुध पंचम भाव में, शनि, शुक्र व केतु षष्ठ भाव में, मंगल नवम भाव, गुरु एकादश भाव में स्थित है और राहु द्वादश भाव में मेष राशिस्थ है। इनकी कुंडली में चंद्र उच्चस्थ अवस्था में स्थित है। इन्हें चंद्र वंशी कहा जाता है। इनका जन्म भाद्रकॄष्ण अष्टमी की मध्य रात्रि को ठीक 12 बजे हुआ था।

भगवान राम एक पत्नी व्रत धारण कर रखा था तो भगवान श्रीकृष्ण की अनेक पत्नियां रहीं। युद्ध क्षेत्र से पलायन करने के कारण भगवान श्रीकृष्ण रणछोड़ भी कहलायें। भगवान श्रीकॄष्ण का जन्म जेल में हुआ। इसका संकेत इनकी जन्मपत्री के लग्न भाव में शनि और चंद्र की युति से भी होता है। यह एक प्रकार का ग्रहण योग है।

पंचम भाव में राहु की स्थिति संतान बाधा देती है। इस बाधा को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को शिव उपासना कर अनुष्ठान करना पड़ा, जिसके फलस्वरुप प्रद्युम्न नामक पुत्र हुआ। भगवान श्रीकृष्ण का अंत छल से हुआ। हिरण समझ कर चलाए गए तीर का वो शिकार बनें।

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें यह बताता है कि जीवन को परिस्थितियों के अनुसार चलाना चाहिए। समय और स्थिति के अनुकूल स्वयं को ढ़ालना ही सफलता और उन्नति का मार्ग है। अवसरवाद का प्रयोग करते हुए धर्म का पालन आज के समय में आवश्यक है।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715, 9811598848

ज्योतिष आचार्या रेखाकल्पदेव पिछले 15 वर्षों से सटीक ज्योतिषीय फलादेश और घटना काल निर्धारण करने में महारत रखती है। कई प्रसिद्ध वेबसाईटस के लिए रेखा ज्योतिष परामर्श कार्य कर चुकी हैं।

आचार्या रेखा एक बेहतरीन लेखिका भी हैं। इनके लिखे लेख कई बड़ी वेबसाईट, ई पत्रिकाओं और विश्व की सबसे चर्चित ज्योतिषीय पत्रिकाओं में शोधारित लेख एवं भविष्यकथन के कॉलम नियमित रुप से प्रकाशित होते रहते हैं।

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Posted By:Acharya Rekha Kalpdev






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