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योगी आदित्यनाथ के प्रेरणा ऐप को प्ले स्टोर पर 1-स्टार की रेटिंग क्यों मिल रही है?

यूपी में दो व्यवस्थाएं सुधारने की बातें होती रहती हैं. एक शिक्षा और दूसरा स्वास्थ्य. और यही दो चीज़ें हैं जिन पर सरकार का आधार बना होता है. पता नहीं क्या सुधरा कितना नहीं, लेकिन इत्ता-बित्ता प्रयास होते रहते हैं.

इसी प्रयास में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक ऐप लेकर आ गए हैं. “प्रेरणा ऐप”. 5 सितम्बर यानी शिक्षक दिवस के दिन झूमकर इसकी लॉन्चिंग होनी है. टीचर इस ऐप से दिन भर में तीन बार अपनी सेल्फी लेंगे. और ऐप के माध्यम से बता देंगे कि वे स्कूल में मौजूद हैं. बच्चों की भी अटेंडेंस इसी से होगी. और दुनिया भर का तियां-पांचा इसी ऐप में है. आने वाले समय में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को ये ऐप इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा. और ये अटेंडेंस वगैरह का काम इसी से होगा.

 

 

अब ऐप लॉन्च हुआ नहीं है, और इस ऐप के बाद कोने-कोने से इस ऐप की बुराई शुरू हो चुकी है. टीचर तो कर ही रहे हैं, एंड्राइड के प्ले स्टोर पर रेटिंग भी बिगाड़ दी है. प्ले स्टोर का पेज खोलिए. इस ऐप रेटिंग वन स्टार है.

पहले जानिए टीचर क्या कह रहे हैं :

कह रहे हैं कि ये उनकी प्राइवेसी के साथ छेड़छाड़ है. और लोग कह रहे हैं कि उनके पास वैसे भी बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां हैं. और उन्हें इन कुछ ज्यादा जिम्मेदारियों से लादा जा रहा है. बनारस में मौजूद राजकीय क्वींस कॉलेज के शिक्षकनाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहते हैं,

“आगे पीछे मिलाजुलाकर वैसे ही इतना काम रहता है. अब आप कह रहे हैं कि दिन में घड़ी-घड़ी फोटो खींचिए. वो भी सेल्फी. और एक ऐसे ऐप पर चढ़ा दीजिये, जिसकी रेटिंग इतनी गिरी हुई है. पंच मशीन थी. लेकिन अब ऐप से प्राइवेसी बिगड़ जानी है, इसकी सरकार को फ़िक्र ही नहीं है.”

ऐप की प्राइवेसी को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित महिला शिक्षिकाएं हैं. वे कहती हैं कि उन्हें पता नहीं कि ऐप पर फोटो क्यों डालें, जिसके बारे में सरकार बता ही नहीं रही है कि प्राइवेसी के लिए वे क्या करेंगे.

गोरखपुर के प्राइमरी विद्यालय में पोस्टेड एक शिक्षिका नाम न छापने की शर्त पर बताती हैं,

“हम पिछले कुछ दिनों से इस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं. एक तरफ सरकार कह रही है कि स्कूलों में शिक्षक फोन का इस्तेमाल न करें. और एक तरफ ऐसी बाध्यता कि दिन भर फोन हाथ में ही रहे. हम पढ़ाएं या फोन यूज़ करते रहें?”

और रेटिंग बिगाड़ने वाले क्या कह रहे हैं?

ये खबर लिखे जाने तक गूगल के प्ले स्टोर पर इस ऐप को एक स्टार की रेटिंग मिली हुई थी. लोग इतनी खराब रेटिंग देने के पीछे तरह-तरह की दलीलें दे रहे हैं. एक शख्स ने लिखा है,

“ये ऐप सरकारी बेसिक शिक्षकों के लिए बेहद खतरनाक है. वे शिक्षक रोज़ाना स्कूल जाने के लिए लम्बे और कठिन रास्ते अख्तियार करते हैं. शिक्षक कीचड़-पानी से भरे हुए रास्ते पारकर स्कूल जाते हैं ताकि समय से स्कूल कैम्पस के अन्दर सेल्फी ले सकें. ये ऐप ये नहीं समझता कि रोज़मर्रा की समस्याएं क्या हैं? ये बस समय पर सेल्फी लेने की भूख है.”

 

 

और एक और शख्स ने लिखा है,

“इस ऐप में कुछ भी अच्छा नहीं है. ये हमेशा से बताता रहता है कि इंटरनेट कनेक्शन कमज़ोर है. और डाटाबेस में शिक्षकों और बच्चों को जोड़ने के बाद ये ऐप सभी इंट्री को अपने से दुहरा देता है. और फिर आप डिलीट करने जाते हैं तो ये कहता है कि कनेक्शन कमज़ोर है. और डिलीट करने में सफलता मिल भी जाती है तो सारी इंट्री डिलीट हो जाती है. घटिया ऐप है ये.”

 

 

लेकिन बहुत सारे लोगों का ये भी कहना है कि ऐसा करना सही है. सरकारी शिक्षक काम नहीं करते हैं. उन पर नियम क़ानून कड़े होने चाहिए. इस ऐप से बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में ख़ासा सुधार आएगा.

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय ने कहा है कि वे इस ऐप के विरोध में आन्दोलन करेंगे. सुशील पाण्डेय ने कहा है,

“महिला शिक्षिकाओं की तस्वीरें लीक की जा सकती हैं और उनका बेजा इस्तेमाल किया जा सकता है. ये उनके गोपनीयता के अधिकार का हनन है. अगर फोटोग्राफ का गलत इस्तेमाल होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”

शिक्षकों का ये भी कहन है कि आज के समय में किसी भी तस्वीर को भयानक और अश्लील तरीकों से एडिट किया जा सकता है. खबरें बताती हैं कि यूपी के कई जिलों से ऐसी सूचनाएं आ रही हैं. जौनपुर और लखीमपुर में इस ऐप के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन सरकार अभी चुप है.



Reported By:ADMIN
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