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इन दो महिलाओं ने आमिर के मोग़ल में काम करने के फैसले की बखिया उधेड़कर रख दी

अभी-अभी आमिर खान ने ऐलान किया है कि गुलशन कुमार की बायोपिक ‘मोग़ल’ से वो दोबारा जुड़ रहे हैं. आमिर ने ‘मोग़ल’ को डायरेक्ट करने वाले सुभाष कपूर पर लगे रेप के आरोपों के सामने आ जाने के बाद फिल्म से अलग होने का फैसला किया था. लेकिन अब उन्होंने अपना ये फैसला बदल लिया है. वो सुभाष के साथ ही बतौर एक्टर और को-प्रोड्यूसर इस फिल्म में काम करने को तैयार हो गए हैं. आमिर ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया. आमिर ने बताया कि जब सुभाष के साथ सबने काम करने से मना कर दिया, जो उन्हें गिल्टी फील होने लगा. महीनों तक उनकी रातों की नींद तक  उड़ गई थी. उन्हें लग रहा था कि अंजाने में उन्होंने सुभाष के साथ कुछ गलत कर दिया है. आमिर ने फिल्म में वापस आने और सुभाष के इल्ज़ामों के बारे में क्या कहा, उसे विस्तार से आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं. लेकिन आमिर के फैसले के बाद मीटू अभियान से जुड़ीं दो सशक्त महिलाओं ने इस बारे में बात की. और आमिर के इस डिसीज़न के कल-पुर्जे खोलकर रख दिए.

सबसे पहले बात गीतिका त्यागी की, यानी वो महिला जिन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर सुभाष कपूर पर उनके साथ रेप का इल्ज़ाम लगाया था. 2016 से वो सुभाष के खिलाफ कोर्ट केस लड़ रही हैं. आमिर के इस फैसले के बाद गीतिका ने कहा कि उन्हें आमिर का ये फैसला बड़ा अजीब लग रहा है. इस बारे में उन्होंने बताया-

”पिछले साल (अक्टूबर, 2018) जब आमिर और किरण ने ये (फिल्म से अलग होने का) फैसला लिया था, तब मैंने उनके इस फैसले को सराहा था. हालांकि मैंने उनसे ऐसा करने के लिए कभी नहीं कहा. लेकिन सुभाष को प्रोजेक्ट पर वापस लाने से पहले उनकी (आमिर या उनकी टीम) ओर से मुझे किसी ने कॉन्टैक्ट नहीं किया. अगर वो दोनों (गीतिका और सुभाष) का पक्ष सुनते, तो ज़्यादा बेतहर और निष्पक्ष फैसला ले सकते थे.”

सुभाष पर रेप का आरोप लगाने के बाद गीतिका ने सबूत के तौर पर एक वीडियो अपलोड किया था. इसमें सुभाष अपनी गलती मानते नज़र आ रहे थे. उसी वीडियो के एक सुभाष को थप्पड़ मारतीं गीतिका. इस वीडियो में सुभाष की पत्नी भी नज़र आती हैं.

आमिर ने इस फिल्म पर वापस आने के लिए जो दलीलें दीं, उसमें इस बात का भी ज़िक्र था कि किसी व्यक्ति पर आरोप भर  लगने से उसका काम नहीं छिनना चाहिए. यानी आमिर को ये बात कचोट रही थी कि उनके किए की वजह से एक आदमी की ज़िंदगी तबाह हो रही है. उसके साथ कोई काम नहीं करना चाहता. इन्हीं बातों पर विचार करने के बाद आमिर ने फिल्म से दोबारा जुड़ने का फैसला लिया. इस पर गीतिका का कहना है-

”मैंने ये कभी नहीं कहा कि सुभाष को काम नहीं मिलना चाहिए. बल्कि मैं ये बता रही हूं कि जब से मैंने सुभाष की शिकायत की है, तब से मुझे काम मिलना बंद हो गया है. हमारी फिल्म इंडस्ट्री का रवैया पितृसत्तात्मक है. सेक्शुअल हैरसमेंट की शिकायत करने की सज़ा भी सिर्फ महिलाओं को ही मिलती रही है. जब वो कंप्लेन करती हैं, तब उनका बहिष्कार करना शुरू कर दिया जाता है. आमिर का ये फैसला संवेदनशील है कि जब तक सुभाष पर लगे आरोप तय नहीं हो जाते, तब तक उनके साथ बुरा बर्ताव नहीं होना चाहिए. पर मेरे काम का क्या, जो मुझे 2014 (इस मामले की कंप्लेन के बाद) से मिलना बंद हो चुका है.”

आमिर ने अपने इंटरव्यू में ये बात भी बताई थी कि वो सुभाष के साथ काम कर चुकीं महिलाओं से मिले थे. और उन सभी महिलाओं ने सुभाष के बारे में अच्छी बातें ही बताईं. इस पर गीतिका का कहना है कि कोई आदमी एक बार गलती कर चुकने के बाद, आगे से सावधानी बरतने लगता है.

तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर उन्हें गलत तरीके से छूने और हैरस करने का आरोप लगाया था. अभी कुछ ही दिन पहले नाना को इस मामले में मुंबई पुलिस से क्लीन चिट मिल चुकी है.

जिन दो महिलाओं का ज़िक्र हमने ऊपर किया था, उसमें दूसरा नाम है तनुश्री दत्ता का. तनुश्री के नाना पाटेकर के खिलाफ सेक्शुअल हैरसमेंट के बारे में खुलकर बात करने के बाद ही मीटू अभियान ने ज़ोर पकड़ा था. उन्हीं तनुश्री दत्ता को आमिर का ये फैसला सुनकर झटका लगा है. उनके मुताबिक आमिर के इस फैसले ने पूरे मीटू मूवमेंट का मकसद ही खत्म कर दिया है. तनुश्री ने इस पर बात करते हुए कहा-

”जब बॉलीवुड में महिलाओं को अब्यूज़ किया जाता है और इस बारे में बात करने वाली महिलाओं का बहिष्कार किया जाता है, तब किसी की रातों की नींद क्यों नहीं उड़ती. जब आमिर ने उस आदमी (सुभाष) को वापस काम दिया, तो उस महिला (गीतिका) को काम क्यों नहीं मिल रहा, जिसे उस आदमी (सुभाष) की हरकतों की वजह से इतना कुछ झेलना पड़ा. बॉलीवुड में सिर्फ घिनौने मर्दों के प्रति ही क्यों दया भावना दिखाई जाता है. महिलाओं के प्रति ये संत लोग ऐसी भावना क्यों नहीं रखते. आप इन मामलों में सिलेक्टिव नहीं हो सकते. ये भावना सबके लिए होनी चाहिए. ये सुविधाजनक रूप से मामले को नज़रअंदाज़ करने के अलावा और कुछ नहीं है. मुझसे किसी ने नहीं पूछा कि ‘हॉर्न ओके प्लीज़’ के दौरान हुई घटना के बाद मेरा करियर और रोजी-रोटी कैसे चल रही है. आमिर, मेरे लिए कोई दया भावना नहीं?”

जहां इन महिलाओं को आमिर के फैसले से शिकायत है, वहीं इंडस्ट्री से जुड़े बहुत सारे लोगों का मानना है कि ये आमिर का बहुत बहादुर फैसला है. लेकिन इन महिलाएं की बातें, कहानी का दूसरा पहलू और फिल्म इंडस्ट्री के दोहरे मापदंड को कुछ ज़्यादा ही खुले में लेकर आ गई हैं. बाकी तो आप समझदार हैं ही.



Posted By:ADMIN






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