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राजस्थान में गैंगस्टर को साथियों ने जैसे छुड़ाया, वैसा तो बस साउथ की फिल्मों में होता है

नेटफ्लिक्स पर एक सीरीज़ है- मनी हिस्ट. उसमें कुछ लोग मिलकर डकैती करते हैं. बहुत ऊपर की डकैती. पुलिस की हर चाल, हर चीज के लिए उनके पास एक प्लान बी होता है. इतनी मूर्ख लगती है न पुलिस उसमें कि हद. भयानक भद्द पिटती है उसमें पुलिस की. ऐसी ही, जैसी राजस्थान पुलिस की पिट रही है पिछले कुछ दिनों से.

राजस्थान का अलवर ज़िला. यहां बहरोड़ पुलिस थाना. 6 सितंबर की सुबह थाने पर हमला हो गया. बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में. AK-47 से लैस करीब 10-15 लोग गोली चलाते हुए थाने के अंदर घुसे. उन्होंने यहां लॉकअप में बंद अपने एक साथी को आज़ाद किया. फिर उसे अपने साथ लेकर चलते बने. कुल 45 राउंड गोलियां चलाईं इन लोगों ने.

गैंग ने जिसे आज़ाद कराया, वो हरियाणा का ‘मोस्ट वॉन्टेड’ क्रिमिनल है. नाम- विक्रम गुर्जर उर्फ़ पपला. उम्र, 28 साल. पपला हरियाणा के महेंद्रगढ़ का रहने वाला है. उसके ऊपर हत्या के कुल पांच मामले बताए जा रहे हैं. इनमें एक कॉन्स्टेबल का मर्डर भी शामिल है. ख़बरों के मुताबिक, पपला का नेटवर्क हरियाणा-राजस्थान की सीमा से सटे इलाकों, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में फैला था. वसूली, किडनैपिंग और डकैती के भी आरोप हैं इस गैंग के ऊपर. करीब दो साल पहले भी पपला हरियाणा में पकड़ाया था. तब उसके गिरोह वालों ने कोर्ट कैंपस में जाकर ऐसे ही गोलीबारी की थी और उसे भगाकर ले गए थे.

पुलिस के हाथ कैसे लगा पपला?
5 और 6 की दरमियानी रात पुलिस की एक टीम गश्ती पर थी. एक गाड़ी पर शक हुआ उन्हें. उसका पीछा किया. उसमें मिला पपला, इनामी अपराधी. ख़बरों के मुताबिक, उस समय तक पुलिस को पता नहीं था कि उनके हाथ कौन लगा है. पपला के साथ उसके कुछ और साथी भी थे. मगर जिस वक़्त पुलिस की टीम गाड़ी की तलाशी ले रहे थे, बाकी लोग मौका देखकर किसी तरह भाग निकले. पपला नहीं भाग सका. उसने पुलिस को अपनी कुछ और पहचान बताई. उसके पास से 31 लाख 90 हज़ार रुपये मिले थे. रात तकरीबन 3 बजे पूछताछ के लिए उसको थाने लाया गया. फिर सुबह औचक ही अपराधियों ने थाने पर हमला किया. गोलियां चलाते हुए थाने में घुसे और लॉकअप से पपला को निकाला. जैसे गोलियां चलाते हुए आए थे वैसे ही चले भी गए. बताया जा रहा है कि हमला होने पर पुलिस को पता चला कि उन्होंने जिसे पकड़ा था, वो पपला था. ‘द प्रिंट’ ने इस बारे में बहरोड़ के DSP रामजीलाल चौधरी से बात की. उन्होंने बताया-

जब गैंग ने हमला किया, थाने में मौजूद कुछ पुलिसवाले सोये ही हुए थे. क्योंकि पिछले दिन वो देर रात तक ड्यूटी पर थे. कुछ पुलिसकर्मी नहा रहे थे.

पुलिस बिल्कुल तैयार नहीं थी मुकाबले के लिए
पपला को भगाने के लिए गिरोह दो गाड़ियां साथ लेकर आया था. इसमें बैठकर ये लोग कुछ दूर गए. रास्ते में इनकी गाड़ी खराब हो गई. फिर गिरोह के लोगों ने बाइक का इंतजाम किया. एक बाइक पर पपला को बिठाकर कच्चे रास्ते से खेतों-खेतों के बीच होते हुए हरियाणा की तरफ निकल लिए. बाकी साथियों ने बंदूक की नोंक पर एक SUV हाइजैक की. फिर उसमें बैठकर हरियाणा निकल गए. राजस्थान पत्रिका के मुताबिक, बॉर्डर पार हरियाणा में पपला को लेने उसके गिरोह के दो दर्ज़न हथियारबंद साथी खड़े थे. पुलिस का कहना है कि उन्होंने अपराधियों का पीछा करने की कोशिश की. नाकाबंदी भी करवाई. मगर उन्हें भागने से रोक नहीं सकी. हमले में चार पुलिसकर्मी जख़्मी हुए.

विभाग ने कार्रवाई करते हुए DSP जनेश सिंह तंवर और बहरोड़ थाने के SHO सुगन सिंह को सस्पेंड कर दिया. दो हैड कॉन्स्टेबल- राम अवतार और विजय पाल बर्खास्त कर दिए गए हैं. थाने के बाकी पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेज दिया गया है. अलवर ज़िले के दोनों SP भी बदल दिए गए हैं. नए SP हैं- नवाब खान और अतुल साहू.

हमले में शामिल लोग पकड़ाए कि नहीं?
अपनी इस किरकिरी के बाद पुलिस ने स्पेशल टीम बनाई. कई जगहों पर छापेमारी की गई. पहले दो लोग पकड़ाए- विनोद स्वामी और कैलाश चंद. ये विनोद स्वामी सरपंच है. पुलिस का कहना है कि हमले से ठीक पहले विनोद आया था थाने. पपला को छुड़वाने. मगर उसको थाने से भगा दिया गया. पुलिस ने तीन और आरोपी पकड़े. इनके नाम हैं- जगन खटाना, महिपाल गुर्जर और सुभाष गुर्जर. आरोप है कि इन तीनों ने ही बाइक पर बैठकर हरियाणा पहुंचने में मदद की पपला की. दैनिक भास्कर की एक ख़बर के मुताबिक, पुलिस को शक़ है कि पपला के दोस्त सोमदत्त का बड़ा हाथ है उसे भगाने में. सोमदत्त पपला के ही गांव का रहने वाला है. हत्या का आरोपी है. ज़मानत पर छूटा, मगर फिर हाथ नहीं आया पुलिस के. उसकी तलाश के लिए पुलिस उसके परिवारवालों से पूछताछ कर रही है.

AK-47 से लैस अपराधियों का थाने पर हमला करके साथी को भगा ले जाना, राजस्थान पुलिस के लिए ये एक बड़ी किरकिरी है. पुलिस की नाकामी, ऐसी स्थितियों से सामना करने की उनकी काबिलियत, राज्य की कानून-व्यवस्था सब पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. ख़बरों के मुताबिक, थाने में मौजूद पुलिसकर्मी बिल्कुल तैयार नहीं थे हमले के लिए. मुकाबला करने की जगह वो जान बचाने के लिए छुप रहे थे. इस वारदात के बाद पुलिस के लिए अपना चेहरा बचाने की चुनौती है. कई टीमें बनाई गई हैं अपराधियों को पकड़ने के लिए. साइबर एक्सपर्ट्स की भी मदद ली जा रही है. ख़बरियों के नेटवर्क को काम पर लगा दिया गया है. ऑपरेशन की जानकारी बाहर न आने पाए, इसके लिए पूरी सिक्रेसी बरती जा रही है. राजस्थान के अलावा हरियाणा की पुलिस भी पपला और उसके साथियों को पकड़ने में लगी है. इनकी ख़बर देने वाले के लिए 1 लाख रुपये का इनाम रखा गया है. ख़बरें आ रही हैं कि पुलिस इनाम की रकम बढ़ाने की भी सोच रही है.

क्या पैसों की घपलेबाजी के चक्कर में हुआ ये कांड?
छीछालेदर के साथ राजनीति भी हो रही है इस केस में. राजस्थान विधानसभा में नेता विपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने इल्ज़ाम लगाया है. कि थाने पर हमला और अपराधी को भगाकर ले जाना सुनियोजित साज़िश थी. जिसमें अपराधियों के साथ मिली हुई थी पुलिस. वसुंधरा राजे सरकार में गृह विभाग था कटारिया के पास. उनका कहना है कि अपराधी पूरी तैयारी के साथ आएंगे, ये तो समझी हुई बात है. मगर पुलिस एक भी गोली नहीं चला सकी, इसपर अचंभा है.

वारदात वाले दिन से ही पुलिस पर उंगलियां उठ रही हैं. एक आरोप ये भी लग रहा है कि पपला के पास से जो पैसे बरामद हुए थे, उसका भी कुछ चक्कर था. कि पपला ने उन पैसों का एक हिस्सा पुलिस को ऑफर किया. भागने के एवज़ में. एक और इल्ज़ाम ये भी लग रहा है कि सीमा पर तैनात पुलिसकर्मियों की भी मिलीभगत हो सकती है. ऐसा इसलिए कि थाने पर हमले के बाद ही अलर्ट जारी कर दिया था. पूरी आशंका थी कि पपला ऐंड गैंग हरियाणा की तरफ भागने की कोशिश करेंगे. ऐसे में वो बॉर्डर कैसे पार कर पाए, ये बड़ी चूक है.

सोशल मीडिया पर फैन पेज हैं पपला के
PTI के मुताबिक, जेल से भागने के बाद पपला लगातार फेसबुक पर ऐक्टिव था. अपनी और गिरोह की तस्वीरें पोस्ट कर रहा था. उसने पहले भी अपनी कई पोस्ट्स में हथियारों के साथ तस्वीरें डाली थीं. पपला के कई सोशल मीडिया अकाउंट हैं. उसके फैन पेज भी हैं. हैरत है. अपराधियों के भी प्रशंसक हैं.

ये एक विडियो शेयर हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि ये विक्रम गुर्जर और उसके साथियों के थाने से भागने के दौरान का है. ये दावा सही है कि नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है (फोटो: फेसबुक)

IANS ने विक्रम की एक पुरानी पोस्ट का ज़िक्र किया है. इसमें उसने लिखा था-

रे, बदमाशी खातिर जिगर चाहिए. जेल तो चोर भी काट ले सई.

माने. मामूली चोर भी जेल से भाग सकता है. मगर बड़े अपराधों के लिए इंसान के पास कलेजा होना चाहिए.



Reported By:ADMIN
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