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हम तो अपनी आड़ में,भा ज पा जाए....

 

              ?  सुरेन्द्र चतुर्वेदी


अजमेर की भाजपा इन दिनों आत्मघाती जत्थों के साथ इस तरह फुटबॉल खेल रही है कि हर खिलाड़ी अपने ही पाले में गोल मार रहा है ।क्या भाजपा शहर अध्यक्ष ,क्या शहर के विधायक, क्या अग्रिम पंक्ति के पदाधिकारी ,और क्या पार्टी से जुड़े संगठन ,सभी इस आपाधापी में लगे हैं कि किस तरह भाजपा के पीछे से पूं की आवाज़ सुनाई दे ।
      एक और जब राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का परचम सातवें आसमान पर लहरा रहा है तब अजमेर की भाजपा अपनी हठधर्मिता और धड़े बाज़ी के चक्रव्यूह में फंसकर मछली बाज़ार बनकर रह गई है। शर्म की बात तो यह है कि प्रदेश अध्यक्ष बनने का  दिवास्वप्न देखने वाले पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी और उनकी मुँह बोली बहन अनिता भदेल भी इस खेल में फारवर्ड खिलाड़ी बने हुए हैं ।अभी हाल में भारतीय युवा मोर्चा की ओर से तिरंगा रैली का आयोजन किया गया। इस रैली को मैं जब देखने पहुंचा तो मुझे दुख हुआ। शहर के मुट्ठी भर युवक वहां मौजूद थे ।भाजपा के अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा का नज़रिया  टेड़ा ही नज़र आया ।पता नहीं वे कैसे  अध्यक्ष हैं कि उनको यह भी नहीं पता कि पार्टी कैसे चलाई जाती है ❓भारतीय युवा मोर्चा की तिरंगा रैली में  युवकों की संख्या को देखते हुए लगा के नवनियुक्त अध्यक्ष दीपक सिंह राठौड़ सिर्फ़ हेड़ा जी के कृपा पात्र होने की वजह से ही अध्यक्ष बने हुए हैं। उनके आगे पीछे युवा पीढ़ी है ही नहीं।पहले वे  अरविंद यादव के साथ थे अब हेड़ा जी  की बगल के  भूरे बाल बने हुए हैं।     
    नेता देवनानी और  भदेल अपनी-अपनी  तरफ से  किसी और को अध्यक्ष बनाना चाहते थे।उन्हें हेड़ा जी ने चूरमा नहीं डाला। नतीजा ये हुआ कि दोनों नेताओं ने संगठन जाए भाड़ में,हम तो अपनी आड़ में...  वाली तर्ज़ पर तिरंगा रैली में अपने क्षेत्र के युवाओं को आधी आंख वाला इशारा कर दिया ।नतीजा ये हुआ कि तिरंगा रैली में उनके युवा कार्यकर्ता नज़र ही नहीं आए। तिरंगा रैली में भाजपा के झंडे ज्यादा थे तिरंगे कम।  बेचारे युवा मोर्चा अध्यक्ष पर्याप्त तिरंगों की व्यवस्था ही नहीं कर पाए। तिरंगा रैली को यदि भदेल और देवनानी तहे दिल से सहयोग करते तो  मेरा दावा है कि यह  रैली ऐतिहासिक बन जाती। ज़रा सोचिए यदि इस मानसिकता के नेता को भाजपा का प्रांतीय अध्यक्ष बना दिया जाए तो वो अपनी भाजपा के चेहरे पर कौन से कलर की पुताई करेंगे ❓भाजपा की दिक्कत यह है कि शिव शंकर हेड़ा इन दोनों विधायकों की छाती पर मूंग दलने( मुहावरा है भदेल मैडम माफ़ करें) के लिए हाईकमान की मेहरबानी से अध्यक्ष पद पर काबिज हैं और स्थानीय विधायक उनकी पुंगी बजाने में लगे हुए हैं ।
   हेड़ा जी के साथ महासचिव आनन्द सिंह राजावत अकेले ऐसे नेता हैं जिन्हें  मैं सच्चा और सकारात्मक सोच का नेता मानता हूँ। वही हैं जो हेड़ा जैसे अध्यक्ष को मैदान में हटने नहीं दे रहे ।जैसे तैसे संगठन को सफल और मजबूत बनाने में लगे हुए हैं वरना तो हेड़ा जी  के साथ नजर आने वाले अशोक राठी ,संजीव नागर, रमेश शर्मा ,दिवाकर ,सुभाष माहेश्वरी, राजेंद्र पवार, और रमेश अग्रवाल ऐसे नेता हैं जिनका हेड़ा जी के  साथ होने का कोई सुप्रभाव उनकी छवि सुरक्षित रखने में कारगर नज़र नहीं आता ।यह सभी लोग भदेल और देवनानी के छाती कुटा खेल में कहीं अड़ नहीं पाते। देवनानी जी चाहते हैं कि अजमेर की भाजपा का ऑफिस उनकी जेब में हो और मैडम जी भी उनके साथ  रक्षाबंधन का त्यौहार मना चुकी हैं ।
     हाल ही में हुए चुनाव में 52 वार्डसे भाजपा की करारी हार के ज़िम्मेदार प्रत्याशी संजय गर्ग नहीं, बल्कि देवनानी जी की हठधर्मिता है।संजय गर्ग बहुत सुलझे हुए व्यक्ति हैं मगर वो नेता नहीं।वो तो  ख़ुद पूर्व पार्षद स्वर्गीय  भागीरथ जोशी को चुनाव लडाते थे।जिताते थे ।वार्ड 52 ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र है।मेरा दावा है कि यदि भागीरथ जोशी के पुत्र अंकित जोशी को उनकी जगह चुनाव लड़ाया जाता तो यह सीट भाजपा  के हाथ से नहीं निकलती ।मगर देवनानी जी ब्राह्मण के बेटे को टिकट कैसे  लेने देते ❓उनके तो ज़ेहन में  सुदामा नाम का जीवाणु हमेशा कुलबुलाता रहता है ।ख़ुद सिंधी बाहुल्य  क्षेत्र का तर्क देकर टिकट ले आते हैं मगर किसी और जाति के बाहुल्य को सम्मान नहीं दे पाते।  यह दोगली विचारधारा उनको  कहां ले जाएगी यह मैं आपको फुर्सत में  आनासागर के किनारे बैठ कर बताऊंगा ।फिलहाल तो इतना ही। किसी को बुरा लगा हो तो......  उखाड़ लें।सुबह ही कटवाई है।?



Reported By:ADMIN
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