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40 साल पहले सुषमा स्वराज को हरियाणा कैबिनेट से इस नेता के कहने पर हटाया गया था

# 6 अगस्त 2019-

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल्ली में निधन हो गया. वो काफ़ी वक़्त से बीमार चल रही थीं. रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें हार्ट अटैक आया. इसके बाद उन्हें एम्स अस्पताल ले जाया गया. उनकी स्थिति पर डॉक्टर्स की टीम लगातार नज़र रखे हुए थी. लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. यहां उन्होंने आख़िरी सांस ली. सुषमा स्वराज 67 वर्ष की थीं.

# 21 जून 1977-

चौधरी देवी लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. पहली बार. जनता पार्टी ने 90 में से 75 सीटों पर जीत हासिल की थी. मगर सबसे बड़ी चुनौती थी मंत्री चुनना. ज्यादा से ज्यादा 10 मंत्री ही बन सकते थे. उसमें भी जनता पार्टी में 6 धडे़ थे. किसी के पास दो विधायक तो किसी के पास 45. सो मंत्री पद के लिए खींचतान शुरू हो गई. खैर कुल 9 मंत्री बने. इसमें एक सुषमा स्वराज भी थीं. देश में सबसे कम उम्र यानी 25 साल की उम्र में कैबिनेट मिनिस्टर बनने वाली महिला. अब बात 17 नवंबर, 1977 की. इंडियन एक्सप्रेस में खबर छपी कि सुषमा स्वराज से कैबिनेट मंत्री का पद छीन लिया गया है. अचानक से. उस वक्त वो हाउसिंग मिनिस्टर थीं. इसके पीछे कारण माना गया सुषमा द्वारा सरकार की आलोचना. सरकार ने हालांकि कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई इस बदलाव के लिए. जो ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी हुआ, उसमें बस इतना बताया गया कि सुषमा के पास जो हाउसिंग, जेल, आर्किटेक्चर, प्रिंटिंग और स्टेशनरी व कल्चरल अफेयर्स के पोर्टफोलियो थे, वो अब सीएम देवीलाल के पास रहेंगे.

जयप्रकाश नारायण के साथ सुषमा स्वराज और उनके पति.

इसके पीछे और क्या वजहें थीं. हमने इसे जानने के लिए उस वक्त विधायक रहे रण सिंह मान से बातचीत की. मान ने सबसे पहले बताया कि-

सुषमा को मंत्रालय पद समाजवादी खेमे के कोटे से मिला था. वो जॉर्ज फर्नांडीज की करीबी मानी जाती थीं. उन्हें मंत्री पद से हटाने का फैसला अचानक नहीं हुआ था. उस वक्त देवीलाल के बेटे ओम प्रकाश चौटाला की सरकार में बहुत चलती थी. देवीलाल उनकी हर बात सुनते थे. जिन लोगों को ओम प्रकाश चौटाला पसंद नहीं करते थे या जो उनके खेमे में नहीं रहते थे, उनका मंत्री पद पर बने रहना आसान नहीं होता था. सुषमा भी उनकी बैड लिस्ट में थीं. सुषमा ने इस बीच सरकार की आलोचना कर मौका भी दे दिया. ओमप्रकाश ने इसका फायदा उठाया और सुषमा को कैबिनेट मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा. हालांकि बाद में उनको फिर मंत्री पद वापस मिल गया था.

1998 में दिल्ली की सीएम बनते वक्त चंद्रशेखर के साथ सुषमा स्वराज.

रण सिंह मान ने ये भी बताया कि ओमप्रकाश चौटाला का जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप ही फिर 1979 में सरकार गिरने का कारण बना था. हर कोई उनके रवैये से उनसे असंतुष्ट रहता था. देवीलाल को भी देर सवेर ये बात समझ आ गई थी. यही कारण था कि जब 1987 में देवीलाल दोबारा सरकार में आए और सीएम बने तो ओमप्रकाश को वो ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे. मान ने बताया कि उन्हें तो उस वक्त देवीलाल के ऑफिस तक में जाने की मनाही थी. चुनाव से पहले आंदोलनों से भी ओमप्रकाश को दूर रखा गया था.

2014 से सुषमा स्वराज विदेश मंत्री का कार्यभार संभाले हुए हैं.

इधर, सुषमा स्वराज की राजनीतिक पारी चलती रही. 1979 में उन्हें जनता पार्टी ने हरियाणा का प्रवक्ता बनाया. किसी भी राजनीतिक पार्टी से पहली बार तब कोई महिला प्रवक्ता बनी थी. सुषमा ने अपना पॉलिटिकल करियर 1970 में एबीवीपी से जुड़कर शुरू किया था. पहला चुनाव 1977 में अंबाला कैंट से जनता पार्टी के टिकट पर लड़ा. 1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार बनी तो वो सूचना और प्रसारण मंत्रालय की कैबिनेट मिनिस्टर बनीं. 1998 में वाजपेयी सरकार से इस्तीफा देकर वो दिल्ली की पहली महिला सीएम बनी थीं. 2000 में उन्हें फिर सूचना और प्रसारण मंत्री बना दिया गया था.

2014 से 2019 तक वो विदेश मंत्री पद पर किस कदर एक्टिव थीं, ये तो हमें देखने को मिला ही. 2019 में उन्होंने स्वास्थय कारणों के चलते ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया था.



Reported By:ADMIN
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