Business News 

370 पर सरकार का समर्थन कर भी क्यों ट्रोल हो गए अरविंद केजरीवाल?

शेर पशुओं का राजा है.
पशु जंगल में रहते हैं.
शेर भी जंगल में रहता है.
जंगल में पानी भी रहता है.
पानी में मगर रहता है.
कहते हैं, पानी में रहकर मगर से बैर नहीं करते.
वैसे ही जंगल में रहकर शेर से बैर नहीं करते.
शेर तो हमारे रीवा के भी फेमस हैं.
पर वो सफ़ेद शेर हैं.
उन्हें इंग्लिश में व्हाइट टाइगर कहते हैं.
टाइगर को बाघ कहते हैं. इस तरह से वो सफ़ेद बाघ हैं.
पर हम बात बाघों की नहीं कर रहे.
शेर की कर रहे हैं.
पर हम ग़ज़ल वाले शेर की बात करना चाहते हैं.
राहत इंदौरी की एक ग़ज़ल है. उसमें एक शेर है. शेर कहता है.

“अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए”

अब हम ग़ज़ल की बात भी नहीं करेंगे, खुल के बाहर आने वालों की बात करेंगे. खुल कर बाहर अरविंद केजरीवाल आए. अनुच्छेद 370 पर अमित शाह के फैसले का समर्थन  किया, क्योंकि हमने ऊपर ही कहा था, पानी में रहकर मगर से बैर नहीं करते. पर ट्वीट तो कर सकते हैं. अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया लिखा.

We support the govt on it.. छोड़ो, हिंदी में बताते हैं. लिखा, , “जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार के फैसलों का हम समर्थन करते हैं. हम उम्मीद करते हैं ये फैसले राज्य के लिए शांति और विकास लेकर आएगा.”

आजकल मौसम बदल रहा है.
मौसम बदलने से वायरल हो जाता है.
वायरल तो ट्वीट भी हो जाते हैं.
ट्वीट वायरल होने पर आदमी ट्रोल हो जाता है.
अरविंद केजरीवाल भी ट्रोल हो गए.

नमूने देखिए.
गब्बर सिंह नाम के अकाउंट ने लिखा. कुछ कोड वर्ड में बोलो, पलक झपकाओ . हम भेज रहे हैं पुलिस.

गब्बर सिंह को है फिकर.

गब्बर सिंह को लगा, केजरीवाल हैक हो गए हैं. मतलब किसी मुसीबत में हैं. सरकार को समर्थन देता उनका ट्वीट किसी ने जबरन लिखाया है. उन्हें कब्जे में लेकर लिखाया है. इसलिए चिंता जाहिर की.

करन थापर देसी नाम के अकाउंट ने दबंग-2 फिल्म का सीन लगाया. पूछा, पर्सनैलिटी के हिसाब से कुछ ज्यादा नहीं बोल रहे हैं ये. इन्हें उम्मीद रही होगी कि दोस्ती बनी रहेगी, इत्ती दोस्ती देख इन्हें भी शक हो गया.

व्हाय शुड दे हैव आल द दिल दोस्ती ईटीसी

सत्य सनातन नाम के एक अकाउंट से पूछा गया, सबूत नहीं मांगोगे. इस ट्वीट में फैक्चुअल मिस्टेक है. ट्रोल करता आदमी ये भूल जाता है कि सब्जेक्ट के साथ जोक जा रहा है या नहीं. पर खैर लिख दिया सो लिख दिया.

फैक्चुअली ग़लत होने के 101 तरीके

इस ट्वीट पर अजय माकन का भी लगभग जवाब आ गया. आप को AAP लिखा, और कहा. “केजरीवाल जी- “AAP” तो ऐसे ना थे, या थे? और जनता को मूर्ख बना रहे थे!”
लगभग कविता सी कर दी. सवाल उठाया कि
“पहले-दिल्ली को केन्द्र शासित से, पूर्ण राज्य की मांग कर रहे थे!
और अब-जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य से, केन्द्र शासित का समर्थन कर रहे हैं?
ट्वीट के अंत में लिखा. “शेर के खाल में लोमड़ी ही थी! अब तो जग ज़ाहिर हे गया है!”
जाते-जाते ‘पार्टनर, तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है’ लिख देते तो तंज़ लगभग पूरा भी हो जाता.

दीवार में खिड़की रहती थी, जंगल में लोमड़ी रहती थी.

किन्हीं देशी भाई ने पूछा, आप तो दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए बेमियादी उपवास पर जा रहे थे. भाई साहब, ये किस लाइन में आ गए आप?

यू आर अ गुड क्वेश्चन

IndianPrism नाम के हैंडल से भी ऐसा ही सवाल पूछा गया. जो लिखा गया, वो कुछ और था पर मतलब ये निकला कि.
भैया को दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य का दर्ज़ा भी चाहिए.
भैया दूसरे राज्य के टूटने और यूनियन टेरेटरी बनने का सपोर्ट भी करते हैं.
भैया, अमित शाह का दिल्ली में विरोध भी करते हैं.
भैया की दिल्ली पुलिस के अमित शाह के अंडर आने से दिक्कत भी है.
भैया अमित शाह के आर्मी और बल से कश्मीर पर राज करने का समर्थन भी कर रहे हैं.
ऐसे कैसे चलेगा भैया, ये तो हिपोक्रेसी है भैया.

कॉपी लेखक के तर्जुमे पर तालियाँ!

किन्हीं चौधरी साब ने पूछा. अभी भी टाइम है. सोच लो, बाद में वहां हलचल हुई तो निंदा तो न करोगे. केजरीवाल भी सोचते हैं, बताओ. कितना खौफ है मेरी निंदा का. इत्ता तो कड़ी निंदा का डर नहीं होता.

निंदा फाजली!

अव्नीजेश नाम के अकाउंट से मौज लेती ये फोटो आई. थ्री इडियट्स फिल्म का सहारा लिया गया.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच में नाक नहीं आती.

सिद्धांत पटेल नाम के यूजर ने प्रवक्ता प्रमुख संबित पात्रा का चेहरा इस्तेमाल किया. आरती का थाल मंगाया.

घोड़े खोल ले… निसुल्ताना रे, प्याज का मौसम आया!

शिल्पी तेवाड़ी नाम के अकाउंट ने भी एकदम दुखती रग पकड़ी. कहा, मतलब आप यूनियन टेरेटरी के साथ विधानसभा वाले फ़ॉर्मेट का समर्थन करते हैं. अब पूर्ण राज्य की मांग छोड़ देंगे.

Tewari को तेवाड़ी ही लिखते हैं? न लिखते हों तो कमेन्ट बॉक्स में बताएं. हम सही कर देंगे!

पल्लवी घोष नाम के अकाउंट से भी ऐसी ही बात आई. कहा गया कि खुशी की बात है कि आप समर्थन करते हैं. पर आप अब जब दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य का दर्ज़ा मांगेंगे तो अस्थिरचित्त लगेंगे.

अनकन्विंसिंग का ट्रांसलेशन गूगल से किया है. खुद को अनकन्विंसिंग लग रहा है.

ऐसी ही ढेरों बातें ट्वीट के रिप्लाई में आईं. किसी ने मौज ली, किसी ने ट्विटर के चलन मुताबिक़ अपशब्द कहे. किसी ने कहा ‘भैया डर गए, भैया डर गए’ पर अंतत: सवाल वही था कि खुद तो पूर्ण राज्य के दर्ज़े की मांग पर चुनाव लड़ रहे थे. जम्मू-कश्मीर के मामले में पलट क्यों गए.

कल ही था काजोल का जन्मदिन

सवाल भी यही उठता है कि ‘मीठा-मीठा गप्प, तीखा-तीखा थू क्यों?’ माने समर्थन करें, उनकी अपनी राजनीति है. पर सेम चीज का विरोध भी तो करते दिखे हैं.

पर वो पॉलिटिकल पार्टी ही क्या जो अपने किए का बचाव न कर ले. कश्मीर और दिल्ली अलग कैसे हैं. ये बताता हुआ ट्वीट आया आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता कम विधायक सौरभ भारद्वाज का. लिखा.

ईवीएम हैकिंग से आसान है इनका ट्वीट समझना

“कश्मीर की दिल्ली और पुद्दुचेरी के साथ तुलना ठीक नहीं है. ये दोनों शांत प्रदेश हैं, उनमें पूर्ण राज्य बेहतर प्रशासन लाएगा. कश्मीर का 2 तिहाई हिस्सा पाकिस्तान और चीन के कब्जे में है. कश्मीर में साल में डेढ़ सौ बार घुसपैठ हो रही है. इनकी तुलना तर्कसंगत नहीं है.

पीटीआई की ख़बर के मुताबिक़ यही बात आम आदमी पार्टी के स्टेटमेंट में भी कही गई कि एक शांत प्रदेश की disturbed border state से तुलना सही नहीं है.

हमें क्या, जो हुआ हमने आपको बता दिया. सही और ग़लत तो रेलेवेंट होता है. समय जैसे. समय बदलेगा, सही ग़लत भी बदल जाएगा. ख़बर तो यही है कि केजरीवाल समर्थन करके भी कोसे जा रहे हैं.

अरविन्द केजरीवाल को बहुत कोसा गया, ये वाला नहीं



Reported By:ADMIN
Indian news TV