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स्नैपडील ने आईफोन की जगह साबुन भेज तो दिया, पर अपने खोदे गड्ढे में खुद गिर गई

ज़माना है इंटरनेट का. काम सब निपटते हैं यहां. ऑनलाइन शॉपिंग. मने जो चाहिए मिलेगा. दुकान जाने की ज़रूरत नहीं. लेकिन ये ऑनलाइन शॉपिंग कभी ख़ुशी कभी गम वाला मामला है. ऑनलाइन शॉपिंग वो चीज़ है जो जम गई तो जम गई वरना काम तमाम ही समझिए. कोई हद खुश हो जाता है तो कोई रिटर्न का ही चक्कर चलाता रहता है. कभी-कभी तो ऐसा भी हो जाता है कि जो मंगवाओ वो आता ही नहीं. जाते थे जापान, पहुंच गए चीन समझ गए ना?

ऐसा ही एक केस है मोहाली में रहने वाले एक इंजीनियर का. जब आईफोन 7 की जगह उन्हें साबुन मिला.

 

 

आईफोन के डिब्बे में से निकला साबुन

# तब क्या हुआ था?

तारीख़ 4 मार्च 2017. जब मोहाली में रहने वाले एक इंजीनियर प्रवीन कुमार शर्मा ने स्नैपडील पर आईफोन ऑर्डर किया. वैसे तो आईफोन अगले एक हफ़्ते में कभी भी आ सकता था लेकिन वो 2 दिन में ही डिलीवर हो गया. क्योंकि शर्मा थे नहीं तो उनका पैकेज घर की केयरटेकर नेत्रा ने ले लिया. यहां तक सब सही था.

घर लौटकर जब पैकेज खोला तो पता चला कि आईफोन 7 है ही नही. आईफोन की जगह साबुन की पांच टिक्कियां हैं. शर्मा ने स्नैपडील के हैल्पलाइन नंबर पर कॉल किया और आप बीती बताई. नतीजा ये कि स्नैपडील ने जांच करवाई और प्रवीन को बताया कि डिलीवरी बॉय की कोई गलती नहीं थी क्योंकि डिलीवरी के टाइम पैकेज पूरी तरह से सील्ड था.

हर कस्टमर की तरह प्रवीन ने भी सोचा था कि उसकी शिकायत पर कंपनी कोई एक्शन लेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. शर्मा के ई-मेल को नज़रअंदाज़ किया गया और उनका अकाउंट भी डिलीट किया गया जिसके बाद शर्मा के पास और कोई रास्ता नहीं बचा था और उन्होंने मोहाली कंज़्यूमर फोरम में 19 जून. 2017 के दिन शिकायत दर्ज की.

#फिर क्या हुआ?

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार शिकायत दर्ज करने के बाद ये मामला लगभग 2 साल तक चला और अब मोहाली के कंज़्यूमर फोरम ने स्नैपडील, पायस फैशन और ब्लू डार्ट को शर्मा को ₹1 लाख का मुआवज़ा देने को कहा है. स्नैपडील जैसी ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों के लिए ये एक अच्छा सबक है. अब कोई भी कंपनी गलत सामान भेजने से पहले ज़रूर सोचेगी.



Reported By:ADMIN
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