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ये रिपोर्ट बता रही है कि सालभर में भाजपा ने खुद का कितना "विकास" किया

ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स. यह संस्था 2003 के बाद से देश में होने वाले हर एक चुनाव पर नजर रखती है. चुनाव लड़ने वालों के हरेक पहलू पर. रिपोर्ट तैयार करती है. नेताजी चुनाव में कितना खर्च करते हैं और उनकी संपत्ति कितनी है, इस पर भी ये संस्था रिपोर्ट लेकर आती है.

कई रिपोर्टों पर हल्ला मच जाता है तो पार्टियां बैकफुट पर चली जाती हैं.

अब ADR राजनीतिक पार्टियों के पास मौजूद संपत्ति और उन पार्टियों पर लगे कर्ज से जुड़ी रिपोर्ट लेकर आई है. कुल सात पार्टियों की संपत्ति का पता चला है. ये पार्टियां हैं- केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस, बसपा, सीपीएम, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी और सीपीआई. इन पार्टियों ने अपनी संपत्ति, निवेश में लगा धन, कर्ज सहित पूरी जानकारी दी है.

2017-18 के आर्थिक वर्ष की समाप्ति पर सभी पार्टियों के पास कुल मिलाकर 3456.65 करोड़ की संपत्ति है. 2016-17 के वित्त वर्ष के दौरान ये आंकड़ा 3260.81 करोड़ का था.

पार्टीवार आंकड़ा देखें तो कई पार्टियों की कुल संपत्ति में बढ़त-घटत हुई है, और इसी हिसाब से उन पर पड़े क़र्ज़ में भी खासे बदलाव हुए हैं.

भाजपा से बात शुरू करें तो पार्टी की कुल संपत्ति में 22.27 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. 2016-17 में भाजपा के पास 1213.13 करोड़ की संपत्ति थी. अब बीते आर्थिक वर्ष में बढ़कर 1483.35 करोड़ की हो गई. ऐसे में तंज कसे जा रहे हैं कि भाजपा का विकास भी हो ही रहा है.

भाजपा का नया-नवेला ऑफिस

बसपा की बात करते हैं. जब पार्टियों के पास मौजूद संपत्ति की बात होती है तो भाजपा के बाद सबसे ज्यादा बात बसपा की ही होती है. हाल में उनके भाई आनंद कुमार की संपत्ति पर आयकर विभाग की नज़र पैनी हुई है. ADR की मानें तो बसपा की संपत्ति 2016-17 में 680.63 करोड़ थी. और 2017 से 2018 तक के आर्थिक वर्ष में बढ़कर 716.72 करोड़ हो गई है.

कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) यानी सीपीएम की कुल संपत्ति बढ़कर 482.1 करोड़ पर पहुंच गई है.

वहीं कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया यानी सीपीआई के पैसों में 61 लाख का इजाफा हुआ है. उनके पास 11.49 करोड़ की संपत्ति हो गई है.

सबके बढ़े ही नहीं हैं, कम भी हुए हैं 

कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी. ये दो पार्टियां जिनकी संपत्ति बढ़ी नहीं, पीछे चली गयी. घट गयी.

कांग्रेस के पास संपत्ति में 15.26 प्रतिशत की कमी हो गयी. कमी मिली और संपत्ति घटकर 724.35 करोड़ रह गयी. वहीं एनसीपी के पैसों में भी कमी आई है. 16.39 प्रतिशत की. उनके पास 9.54 करोड़ रूपयों की संपत्ति बची है. इस लिस्ट में लगभग सबसे गरीबी शरद पवार की एनसीपी ही लग रही है. क्या पता और कमी आ जाए तो पार्टी कहां जाएगी?

लेकिन इस लिस्ट में कर्जदारी की भी बातें हैं. हमने पहले भी बताया है. तो वित्तीय वर्ष 2017-18 में सबसे अधिक देनदारी कांग्रेस की रही है. 324.20 करोड़ रूपये की. उसकी देनदारी में कमी आई है. 2016-17 में ये 461.73 करोड़ की थी. भाजपा की देनदारी 21.38 करोड़ की है. लेकिन 2016-17 के वित्तीय वर्ष के मुकाबिले भाजपा का कर्ज बढ़ा है, लेकिन कर्जे में चैम्पियन कांग्रेस ही है.



Reported By:ADMIN
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