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जब सुषमा स्वराज ने रात में छापा मारना शुरू कर दिया था

सुषमा स्वराज के जाने के बाद उनके किस्से सुनाए जा रहे हैं. ऐसे में बतौर दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री उनका ये छोटा किस्सा इस फेहरिस्त में ज़रूर गिना जाना चाहिए.

और हम यहां बात कर रहे हैं उस समय की जब सुषमा स्वराज दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी थीं. मार्च 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में दक्षिणी दिल्ली सीट से सुषमा स्वराज भाजपा प्रत्याशी थीं. सामने थे कांग्रेस के अजय माकन. चुनाव सुषमा जीत गयीं. चुनाव जीतने के बाद उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय और दूरसंचार मंत्रालय दिए गए.

लेकिन कुछ ही दिनों बाद, यानी अक्टूबर 1998 में उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री बना दिया गया. इसी साल दिल्ली में चुनाव होने थे. सोचना था कि सुषमा स्वराज दिल्ली में भाजपा को जिताने में मदद करेंगी. कैम्पेन भी हुए. लेकिन भाजपा हार गयी. 53 दिनों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद सुषमा स्वराज ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

लेकिन जब तक मुख्यमंत्री थीं, थानों में छापा मारती थीं 

हां. सुषमा स्वराज का ये किस्सा सबसे रोचक है. जब तक वे दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं, तब तक उन्होंने बीड़ा उठा रखा था दिल्ली की कानून व्यवस्था सुधारने का. अखबारों के मुताबिक़, सुषमा स्वराज ने कहा था कि वे खुद अगर रात को जागेंगी, तभी दिल्ली वाले चैन से सो पाएंगे.

और त्रिलोकपुरी से सुषमा स्वराज के vigilante मोड की शुरुआत होती है. लोग कहते हैं कि उन्होंने रात को थानों में छापा मारना शुरू कर दिया. एक रात त्रिलोकपुरी थाने बिन बताए पहुंच गयीं, तो मौके से कई अधिकारी गायब मिले. बाद में अधिकारियों की जमकर क्लास लगी.

इस घटना के बाद काफी हड़कंप-सा मच गया. कई अधिकारियों की शामत आ गयी. इसके बाद कहा जाता है कि सुषमा स्वराज ने कई पुलिस थानों पर रात को छापे मारे, जिसके बाद, ऐसा कहा जाता है, कि दिल्ली की क़ानून व्यवस्था में ख़ासा सुधार हुआ.



Reported By:ADMIN
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