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कांग्रेस की टॉप मीटिंग में सोनिया-राहुल के सामने क्यों भिड़े यूपी और कश्मीर के नेता?

जम्मू कश्मीर को खास दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधान हटाने और राज्य के बंटवारे के बाद सबसे ज्यादा बंटी दिखी कांग्रेस. लोकसभा हो या सोशल मीडिया, पार्टी के अहम नेताओं के स्टैंड अलग थे. और यही था मुद्दा 6 अगस्त 2019 को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग का. और इस मीटिंग में तीखी बहस भी हुई. जिसके बाद कई नेता गांधी परिवार के चलते डिफेंसिव मोड में नजर आए.

सूत्रों के मुताबिक सबसे पहले गुलाम नबी आजाद ने विस्तार से अपनी बात रखी. फिर बारी आई जितिन प्रसाद की. उन्होंने कहा-

कश्मीर पर हमारे रुख को लोगों का समर्थन नहीं है.

पी चिदंबरम ने इस तर्क पर उन्हें काउंटर किया और कहा-

केरल, तमिलनाडु में ऐसा नहीं है. जनभावना का तर्क देकर कल को तमिलनाडु में हिंदी कंपलसरी कर दी तब क्या कहेंगे. पुराने कमिटमेंट भूल जाएंगे.

तब जितिन ने साफ किया और कहा-

मैं यूपी से आता हूं और वहां का माहौल साफ देख सकता हूं.

फिर बारी आई उनकी, जिन्हें कुछ लोग अगले कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर प्रोजेक्ट करने में लगे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया. उन्होंने भी पब्लिक सेंटिमेंट को ध्यान में रखते हुए ट्वीट करने की बात कही.

ज्योतिरादित्य सिंधिया का ट्वीट देखिए-

हरियाणा से आने वाले कुलदीप बिश्नोई और दीपेंदर हुड्डा ने भी यही बात दोहराई. ये तीनों बोले-

हम सरकार के तरीके से असहमत.

और दूसरे तीन देखते रहे. बिना सर हिलाए. सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी. यूपी के ही नेता आरपीएन सिंह ने पार्टी की दुविधा सामने रख दी. सिंह बोले-

तकनीकी रूप से हमारी आलोचना सही हो सकती है, लेकिन पब्लिक को क्या बताएं. ये सियासी मामला है. उस पर स्पष्ट स्टैंड बने.

बैठक के दौरान राहुल ने कहा- पब्लिक क्या सोच रही है, वो पैमाना नहीं हो सकता. (फाइल फोटो)

आखिरी में राहुल और प्रियंका बोले. कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष राहुल ने कहा-

सिर्फ पब्लिक क्या सोच रही है, वो पैमाना नहीं हो सकता.

पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सुर मिलाते हुए कहा-

मोदी सरकार ने लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है.

सोनिया ने सहमति दर्ज की तो प्रस्ताव रखा गया. मगर इस प्रस्ताव के पहले ड्राफ्ट में पीओके का जिक्र नहीं था. इसे बाद में जोड़ा गया. जरूरत इसलिए भी थी क्योंकि लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पार्टी की काफी छीछालेदर करा दी थी. चौधरी कश्मीर को अंतर्राष्ट्रीय मसला बता गए. बाद में कमजोर सफाई देते दिखे.

फिर कांग्रेस का कागज आया. कश्मीर ही नहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी हमारा है और इसमें किसी की मध्यस्थता स्वीकार नहीं. 370 पर चर्चा तो हुई मगर जबानी. और वो चर्चा, जिससे कांग्रेस अब तक बचती आई है. कि अध्यक्ष कौन. उसके लिए शायद 10 अगस्त की सीडब्ल्यूसी का इंतजार हो.



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