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नॉर्थ कोरिया से ज्यादा खतरनाक हैं चीन के ये राजनैतिक कत्ल

अभी मलेशिया में नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जांग उन के सौतेले भाई किम जांग नाम की हत्या हो गई. एक औरत का हाथ बताया जा रहा है मर्डर में. इस राजनैतिक हत्या के बाद मलेशिया और नॉर्थ कोरिया के रिश्तों में तल्खी आ गई है. पर ये कुछ नहीं है, जो कि चीन में हो रहा है.

चीन के प्रेसिडेंट हैं जी जिनपिंग. कहते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति के बाद दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान हैं जिनपिंग. 2012 में प्रेसिडेंट बनने के बाद इन्होंने चीन को एकदम से आगे खड़ा कर दिया है. पैसे और बिजनेस से नहीं. ताकत के प्रदर्शन से. कहीं हथियारों की ताकत, कहीं पैसे की ताकत. भारत, पाकिस्तान से लेकर जापान, रूस तक अपनी दृष्टि डाल रहे हैं. दुनिया में किसी नेता के पास इतनी पदवियां नहीं हैं जितनी इनके पास हैं. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी हैं, जो इनको चीन में सबसे ताकतवर बनाता है. पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के प्रेसिडेंट हैं, जो दुनिया में उनको एक बड़ी जगह दिलाती है. चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के हेड थे. इस साल अप्रैल में इन्होंने एक नया टाइटल लिया: कमांडर-इन-चीफ. इसके बाद मिलिट्री अब पूरी तरह इनके कमांड में आ गई. इसके पहले आर्मी प्रेसिडेंट से बहस भी कर लेती थी. अब पालतू हो गई.

पर खबर ये नहीं है. खबर है कि जिनपिंग ने अपने लिए एक नया टाइटल लिया है. इनको पार्टी का कोर कहा जाएगा अब से. बंद दरवाजों के भीतर ये फैसला हुआ. बाहर के लोगों को लगेगा कि चक्रधर बनो या विषधर, टाइटल से फर्क क्या पड़ता है. पर चीन में टाइटल बहुत फर्क डालता है. कोर का टाइटल आज तक सिर्फ दो लोगों को मिला है- माओ और डेन जियापिंग. ये दोनों ही चीन को चीन बनाने वाले नेता थे. फिर किसी नेता ने हिम्मत नहीं की थी ये टाइटल लेने की.


जो देश दुनिया की नाक में नकेल डाल रहा है, उस देश की नेतागिरी कैसी होगी? फिर जिस देश में सिर्फ एक पार्टी है, उसके नेता कैसे होंगे? जहां डेमोक्रेसी नहीं है वहां नेता कैसे बनते होंगे? जहां नेता ताकत हासिल करने के लिए एक-दूसरे को मरवा सकते हैं, वहां एक आदमी कैसे उभरता होगा? फिर इस नेता ने क्या समझाया होगा कि इसे कोर की पदवी दे दी गई?


 

 

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जिनपिंग जिस साल प्रेसिडेंट बने, उस साल तक चीन अपने पैरों पर खड़ा हो चुका था. इसके पहले चीन अपने आपको दिखाने में शर्माता था. बहुत सारे मुद्दों में बोलता नहीं था. पर जिनपिंग ने सब बदल दिया. जब चीन की जनता को लगा कि ये आदमी दुनिया के बड़े देशों का गुस्सा झेला देगा चीन को, तब जिनपिंग ने राष्ट्रवाद और गौरव का पिटारा खोल दिया. याद दिलाने लगे कि चीन का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है. उस समय पूरब से लेकर पश्चिम तक चीन का ही रौला था. मैं फिर वही वक्त लाऊंगा.

जिनपिंग के पिता भी शासन में रहे थे. तो इनको सत्ता का अनुभव है. पहले से पता था कि क्या दांव खेलना है. आते ही डिक्लेयर किया कि करप्शन बर्दाश्त नहीं करेंगे. गीदड़ों को भी नहीं छोड़ेंगे, शेरों को भी नहीं. उसके बाद जो किया, उसने लोगों का नशा फाड़ दिया:

1. दुनिया आंखें फाड़ देखती रही कि पिछले दस साल से चीन की राजनीति में सबसे धाकड़ लोगों में से एक झाऊ योंगकांग को भ्रष्टाचार के आरोप में आजीवन कारावास सुना दिया गया.

इसके एक दिन पहले तक इस आदमी के सामने कोई बोलता नहीं था चीन में. इसके बाद पार्टी में लोगों के तोते उड़ गए. जो डर व्याप्त हुआ कि पूछिए मत. एक तरफ चीन की इकॉनमी गड़बड़ा रही थी, दूसरी तरफ करप्शन के नाम पर लोग धकियाए जा रहे थे.

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झाऊ योंगकांग

2. इसके साथ और लोगों का भी नंबर आया. पिछले प्रेसिडेंट हू जिंताओ के करीबी लिंग जिहुआ को रिश्तेदारों के साथ डिटेन किय़ा गया. करप्शन के आरोप में. जुलाई 2015 में आजीवन कारावास हुआ.

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लिंग जिहुआ

3. जू कैहू. मिलिट्री के सबसे बड़े अफसर. घूस के आरोप में पकड़े गए. 2015 में जेल में ही मर गए. संदिग्ध स्थिति में.

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जू कैहू

4. मिलिट्री के एक और जनरल गुऔ बॉक्सियांग भी घूस के आरोप में पकड़े गए. जेल में मरे. संदिग्ध स्थिति में.

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गुऔ बॉक्सियांग

प्रेसिडेंट बनने के बाद चीन की विदेश नीति को आक्रामक बना दिया है जिनपिंग ने. जापान और फिलीपींस के साथ बार-बार उलझ रहे हैं. अपने जहाज भेज देते हैं उनके इलाकों में. जिनपिंग जब भारत के दौरे पर आए तभी चीनी सेना ने चुरू में भारतीय सैनिकों को बंधक बना लिया था. ये एकदम डरावनी नीति थी. भारत ने बहुत संयम से काम लिया था. ये किसी और देश के साथ होता तो जंग हो जाती.

तो चीन का प्रेसिडेंट अब वहां खड़ा है, जहां जाने के लिए दुनिया का हर नेता सपना देखता है. कह सकते हैं कि पूरी दुनिया में यही मारा-मारी मची हुई है.



Reported By:ADMIN
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