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नॉर्थ कोरिया शुरू कर रहा है अमेरिका से जंग!

नॉर्थ कोरिया ने अपना पांचवा एटम बम फोड़ लिया है. साउथ कोरिया के पंछियों ने बताया. इस नेक काम के बारे में उनको हवा भी नहीं लगी थी. पता चला तब, जब नॉर्थ कोरिया के उत्तर-पूर्वी बॉर्डर पर जमीन हिलने लगी. धमाके से हल्का भूकंप आ गया था. अमेरिका और यूरोप के गुप्तचरों ने भी इस बात पर हां की.

अमेरिका तक मिसाइल पहुंचाने का इरादा है 

नॉर्थ कोरिया के एटम बम एक न्यूक्लिअर मिसाइल के लिए तैयार किये जा रहे हैं. इनको उम्मीद है कि एक दिन ये मिसाइल अमेरिका तक पहुंच जायेंगे. यूरोप और अमेरिका नॉर्थ कोरिया पर पहले ही कई तरह के प्रतिबन्ध लगा चुके हैं. हर तीन-चार साल में नॉर्थ कोरिया एक टेस्ट कर ही लेता है. इनके नेता किम जोंग उन मुस्कुराते चेहरे के साथ वहां खड़े रहते हैं. ये हमेशा अमेरिका को धमकी भी देते रहते हैं. बिना ये सोचे कि नॉर्थ कोरिया दुनिया के सबसे ज्यादा प्रतिबंधों वाला देश है!

चीन नॉर्थ कोरिया का एकमात्र दोस्त है. पर धीरे-धीरे वो भी फ्रस्ट्रेट हो रहा है. पर अमेरिका नॉर्थ कोरिया से उकता चुका है. एशिया में उसके बहुत सारे दोस्त भी हैं और उसके बहुत सैनिक बेस भी हैं. इसके अलावा अमेरिका दुनिया में व्यापार बढ़ाने के लिए बहुत उत्सुक है. पर नॉर्थ कोरिया अमेरिका के लिए नासूर बन गया है.

साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया में वही रिश्ता है, जो भारत और पाकिस्तान के बारे में लोग अपने घरों में कहा करते हैं. फिर साउथ कोरिया अमेरिका का साथ पाकर बहुत आगे बढ़ चुका है. इसकी तुलना में नॉर्थ कोरिया बेहद गरीब है.

ईस्ट एशिया के साउथ में कोरिया है. दो देशों के रूप में टूटा हुआ: नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया. नॉर्थ कोरिया चीन से लगा हुआ है. उसके बाद 38 डिग्री पैरेलल लाइन है. फिर शुरू होता है साउथ कोरिया.

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एक ही देश के दो टुकड़े कैसे हुए?

इतिहास में कोरिया अलग ही देश था. कोरिया के कई राजा वहां राज करते थे. कभी-कभी चीन और जापान के राजा भी हमले कर राज कर लेते. पर बीसवीं सदी में जापान ने 1910 से लेकर 1945 तक कोरिया पर कब्ज़ा कर लिया.

जब दूसरा विश्व-युद्ध ख़त्म हो रहा था, तब सोवियत यूनियन ने जापान पर हमला कर दिया. और कोरिया के उत्तरी हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया. विश्व-युद्ध ख़त्म होने तक अमेरिका और रूस आपस में भिड़ चुके थे. नतीजन कोरिया को दो भागों में तोड़ दिया गया. नॉर्थ कोरिया रूस के प्रभाव में. और साउथ कोरिया अमेरिका के प्रभाव में.

नॉर्थ कोरिया धीरे-धीरे कम्युनिस्ट होता गया. साउथ कोरिया ने इसका बड़ा विरोध किया. और अपने यहां कैपिटलिस्ट सरकार बना ली. ये तय कर लिया कि नॉर्थ कोरिया की कम्युनिस्ट सरकार को सपोर्ट नहीं करना है. ये सब हुआ टूटने से चार साल पहले एक रहे देश में!

देश को एक करने के चक्कर में मामला ज्यादा बिगड़ गया

15 अगस्त 1948 को साउथ कोरिया ने सिंगमैन री को प्रेसिडेंट चुन लिया. नॉर्थ कोरिया ने किम सुंग को. फिर दोनों ने कोरिया को एक करने की कोशिश शुरू कर दी. पर अपने हिसाब से. इधर रूस और चीन नॉर्थ कोरिया को हर तरह से सपोर्ट करने लगे. नतीजा हुआ कि कोरिया के दोनों हिस्से बॉर्डर पर आपस में लड़ पड़ते.

25 जून 1950 को नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया पर हमला कर दिया. कई शहरों पर कब्ज़ा कर लिया. तुरंत यूएन के नाम पर अमेरिका ने कई देशों की सेना साउथ कोरिया की मदद के लिए भेज दी. चार महीने बाद इन लोगों ने नॉर्थ कोरिया की राजधानी पर कब्ज़ा कर लिया. पर तब चीन भी नॉर्थ कोरिया के साथ आ गया. और जनवरी 1951 में साउथ कोरिया की राजधानी पर कब्ज़ा कर लिया गया.

धीरे-धीरे शांति की बात भी होने लगी. एक तरफ लड़ाई चलती, दूसरी तरफ शांति की बात. 27 जुलाई 1953 को बातें ख़त्म हुईं और एक Demilitarized Zone बनाया गया. मतलब बॉर्डर के इस एरिया में किसी की सेना नहीं रहेगी. एक एग्रीमेंट भी लाया गया. सभी तैयार थे. पर साउथ कोरिया ने इसे कभी साइन नहीं किया.

शांति की तलाश में कभी ना ख़त्म होने वाली लड़ाई शुरू हो गई

कोरियाई लड़ाई तो ख़त्म हो गई, पर टेंशन बना रहा. फिर 1968 में नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट को क़त्ल करने का प्लान बनाया. कोशिश की, हो नहीं पाया. पर इस बात ने निश्चित कर दिया कि अब दोनों के बीच किसी तरह का मेल सोचना बेवकूफी है. 1983 में बर्मा में नॉर्थ कोरिया के हत्यारों ने साउथ कोरिया के 17 अफसरों को बम से उड़ा दिया. इन पर 1987 में साउथ कोरिया के एक प्लेन को उड़ाने का भी इल्जाम लगा. इसके साथ ही दोनों देशों के नेता ‘एक’ होने का भी प्लान बनाते रहे. पर अपने हिसाब से ही. उसमें कमी नहीं आई थी.

2010 में दोनों देशों के बीच जंग की नौबत आ गई थी. क्योंकि साउथ कोरिया का एक जहाज डुबा दिया गया था. साउथ कोरिया ने क्लेम किया कि ये नॉर्थ कोरिया का काम है. नॉर्थ कोरिया ने इनकार कर दिया. इस बात से साउथ कोरिया बिल्कुल चिढ़ गया. ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान के आतंकवादी हरकत की जिम्मेदारी ना लेने से इंडिया चिढ़ जाता है. फिर उसी साल दोनों कोरिया समुद्री बाउंड्री को लेकर लड़ पड़े. तब से दोनों ही देश अपनी ताकत बढ़ाने में लगे हैं.

2011 में पिता के मरने के बाद किम जोंग उन नॉर्थ कोरिया के प्रेसिडेंट बने. तब से इन्होंने अपना पूरा ध्यान एटम बम बनाने पर ही लगाया है. नॉर्थ कोरिया प्रतिबंधों के चलते ज्यादा बिजनेस नहीं कर पाता. इससे वहां गरीबी बहुत ज्यादा है. इस देश में बाहर के लोगों को हर जगह नहीं जाने दिया जाता. वहां से हर खबर भी बाहर नहीं आ पाती. हर महीने ये जरूर पता चलता है कि किम के भाषण में सो रहे मिलिट्री अफसर या कैबिनेट मिनिस्टर को गोली से उड़ा दिया गया.



Reported By:ADMIN
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