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अगर भाजपा एमसीडी चुनाव हार जाए तो मोदी-शाह को बहुत फायदा होगा

दिल्ली के राजौरी गार्डन सीट के विधानसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी हार गई है. इसी सीट के कैंडिडेट जनरैल सिंह पंजाब चुनाव में पार्टी के मुख्य नेता बने थे. वहां पर भी पार्टी बुरी तरह हारी. हालांकि गुजरात में ये पार्टी मजबूत हुई थी. वहां पर इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है. वहां भाजपा की सरकार है.

पर भाजपा को आम आदमी पार्टी की इस हार से कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है. क्योंकि गुजरात में आप कमजोर होने लगी है. उना के दलित आंदोलन के बाद आप थोड़ी मजबूत हुई थी. पर धीरे-धीरे रंग उतरने लगा है. इसी में बाकी जगहों पर मिली हार उनको और कमजोर कर सकती है. भाजपा इससे नाखुश ही होगी. क्योंकि गुजरात में आप के कमजोर होने से सीधा फायदा कांग्रेस को होगा. क्योंकि आप पहले कांग्रेस के ही वोट काटती है.

विधानसभा के चुनावों के नतीजों को देखें तो ज्यादातर वक्त भाजपा का प्रदर्शन तब ज्यादा बढ़िया रहता है जब कई पार्टियां दावेदार होती हैं. हालांकि उत्तराखंड का चुनाव इसका अपवाद रहा है. यहां पर डायरेक्ट फाइट कांग्रेस से थी. गोवा में भी ऐसा ही था. पर इन दोनों राज्यों में छोटी पार्टियां की-रोल निभा रही थीं. इस नाते ये कहा जा सकता है कि कई पार्टियों के महत्वपूर्ण रहने की सूरत में भाजपा जीतने लगती है.

इसी तर्क को अगर आगे बढ़ाएं तो भाजपा को सबसे ज्यादा फायदा दिल्ली के एमसीडी चुनाव में हार जाने पर होगा. जिस चुनाव में प्रधानमंत्री से लेकर योगी आदित्यनाथ तक को लाने की बात कही जा रही है, उस चुनाव की हार भाजपा को गुजरात जीतने में मदद करेगी.

इसकी बहुत ही शातिर किस्म की वजहें और प्रभाव हैं:

1. अगर केजरीवाल एमसीडी चुनाव जीत जाते हैं तो वो ईवीएम का मसला भूल जाएंगे. इससे भाजपा की क्रेडिबिलिटी बढ़ेगी कि वो तो हमेशा सत्य ही बोलते हैं. केजरीवाल झूठ का सहारा लेकर बदनाम कर रहे थे.

2. आप गुजरात में मजबूत होगी. जिससे कांग्रेस का वोट कटेगा. और भाजपा को सीधा फायदा होगा.

3. दिल्ली में सफाई की जिम्मेदारी अब केजरीवाल की हो जाएगी. प्रधानमंत्री रोज विदेश जाते वक्त कार से कूड़े के साथ सेल्फी लेकर केजरीवाल को टैग कर सकते हैं. बाकी तो ट्रोलर्स संभाल लेंगे.

4. कभी-कभी अमित शाह भी सेल्फी ले सकते हैं. कुमार विश्वास को टैग कर बस इतना लिखना है कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है. इसके बाद कुमार संभाल लेंगे.

5. क्योंकि सच तो ये है कि दिल्ली में सफाई करवा सकने का दम किसी पार्टी के पास नहीं है. सफाई अब अत्याधुनिक संयंत्र लगने पर ही हो पाएगी. क्योंकि इतने ज्यादा कूड़े का निस्तारण झाड़ू को पोस्टर पर छपवाने और स्वच्छ भारत सेस लगाने से नहीं हो सकता.

6. डिमाॉनिटाइजेशन के वक्त प्रधानमंत्री को लगा था कि लोग जब लाइनों में रहेंगे तो थोड़ा-थोड़ा साफ-सफाई भी करेंगे. पर लोगों ने ध्यान नहीं दिया. अब पीएम हर बात तो खुल के नहीं कहेंगे ना. कहते तो केजरीवाल फिर घेर लेते.

7. आप तो खुद प्रचार कर रही है दिल्ली में कि सत्ता बदलनी चाहिए. पर ये नहीं बता रहे हैं कि किसकी. क्योंकि हमारी समझ से एमसीडी जीतने को सत्ता में रहना तो नहीं ही कहा जा सकता. इसी गाने का इस्तेमाल भाजपा कर ले तो काम बन जाए. तो एमसीडी चुनाव के चलते भाजपा का खर्चा भी बचेगा.



Reported By:ADMIN
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