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बातों को पकड़े रहने की आदत छोड़ें - ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

 

ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में तनावमुक्ति षिविर का दूसरा दिन

‘‘टिकरापारा में चल रहे तनावमुक्ति षिविर के दूसरे दिन ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि हम थोड़ा गहराई से सोचें कि किसी वस्तु को चाहे कागज का टुकड़ा ही क्यों न हो, बहुत देर तक नहीं पकड़ सकते। कुछ घण्टे ही पकड़ने के बाद हमारे हाथों में दर्द होने लगेगा, यदि किसी ने चैलेन्ज किया तो जबरदस्ती कुछ देर और पकड़ लेंगे लेकिन उसके बाद हाथ अकड़ सकता है - ये तो हो गई शरीर की बात। लेकिन यह भी सोचे कि हम किसी की कही हुई बात को सालों साल तक मन में पकड़कर रखे रहते हैं जो कि निष्चित ही हमें तनाव देगा। यदि उस बात को हम कुछ समय और हम पकड़े रहें तो हो सकता है हम अवसाद अर्थात् डिप्रेषन की अवस्था में चले जाएं। और खास सोचने वाली बात तो यह है कि हम जिनकी बातों को पकड़े हुए हैं वो तो बहुत खुष हैं। और हमारा ही मन दर्द में, तनाव में, दुख में रहता है। ये तो समझदारी नहीं हुई न।’’

दीदी ने मेडिटेषन के द्वारा आत्म अनुभूति कराई और कहा कि आत्मा का ओरिजिनल प्रेम, शांति, सुख है। आज मनुष्य अपनी शक्तियों का केवल 10 प्रतिषत या उससे भी कम उपयोग करता है। जैसे हनुमान जी को अपनी शक्तियों की स्मृति नहीं थी पर जैसे ही जामवंत जी ने उन्हें शक्तियों की स्मृति दिलाई वे शक्तिषाली हो गए। ऐसे ही मेडिटेषन में जब हम परमात्मा से कनेक्ट होते हैं तो उस प्यार के, शांति के सागर, सर्वषक्तिमान परमात्मा से हमारे अंदर शक्तियों का संचार होने लगता है और हमारे अंदर प्यार, शांति, शक्ति का स्रोत बहने लगता है। उसके बाद जब हम कर्मक्षेत्र में आते हैं तो हमसे प्रेम व शांति की गंगा बहने लगती है।



Reported By:Admin
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