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ये राहुल अब पहले वाला राहुल गांधी नहीं रहा, तेवर बदल गए हैं इनके

राहुल गांधी ने 16 दिसंबर को औपचारिक तौर पर कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान संभाल ली. उनके कमान संभालने  से एक दिन पहले ही सोनिया गांधी ने राजनीति से रिटायर होने का ऐलान कर दिया था. बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ताजपोशी के लिए देश के कोने-कोने से कार्यकर्ता दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे और राहुल के अध्यक्ष बनने की खुशी जाहिर की. इसी के साथ कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया गांधी के अध्यक्ष की नेम प्लेट हटाकर राहुल की नेम प्लेट लगा दी गई है.

कांग्रेस मुख्यालय पर जश्न मनाने के लिए पूरे देश से कांग्रेस कार्यकर्ता जुटे थे.

कांग्रेस मुख्यालय पर जश्न मनाने के लिए पूरे देश से कांग्रेस कार्यकर्ता जुटे थे.

2004 में पहली बार सांसद बनकर सियासत में कदम रखने वाले राहुल गांधी को अब राजनीति में 13 साल से भी अधिक का वक्त हो गया है. शुरूआत में तो लड़कपन होता है. कुछ भी कहो, चल जाता है. मगर सब दिन लड़के ही बने रहो, ये नहीं चलता. ये सारे उदाहरण राहुल गांधी के लिए हैं. वो भी अब पुराना चावल हो रहे हैं. पहले से ज्यादा गंभीर. पहले से ज्यादा समझदार. पहले से ज्यादा जिम्मेदार. हुए हैं कि नहीं, मालूम नहीं. मगर दिख तो ऐसे ही रहे हैं. और अब तो उनके पास कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी है.

24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की नेम प्लेट लगा दी गई है.

24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की नेम प्लेट लगा दी गई है.

गुजरात चुनाव से पहले राहुल गांंधी बड़ी हिचक-हिचक में रहते थे. उनको देखकर लगता था कि कोई शहरी बाबू पहली बार गांव में आया है. विलेज टूरिज्म उर्फ ग्रामीण पर्यटन के लिए. लगता था अभी चूल्हा देखकर बोल पड़ेंगे. वॉट इज डैट? कई बार ज्यादा भावुक हो जाते थे. सुनकर लगता था कि राजनीति में मन नहीं लग रहा है इनका. बेमन से कर रहे हैं. कई बार उनकी साफगोई पार्टी को भारी पड़ जाती थी. अपने ही लोगों को मुश्किल में डाल देते थे. मगर अब देखो उनको. कितना बदल गए हैं. बातें भी अच्छी छानने लगे हैं. टाइम पर शॉट मारते हैं. पंच भी अच्छे होते हैं उनके. लोगों के साथ ज्यादा कनेक्ट हो रहे हैं. कई बार बड़ा बड़प्पन दिखा जाते हैं. खुलकर खेल रहे हैं. मगर कई जगह संयम भी बनाकर रखते हैं.

राहुल को खुद भी दिखता होगा. जब से उन्होंने अपना अंदाज बदला है, तब से उन्हें तवज्जो मिलनी बढ़ गई है. एक वक्त ऐसा था कि वो जो भी बोलते थे, उसपर उनका मजाक उड़ता था. अब वो छवि काफी बदल गई है.

राहुल को खुद भी दिखता होगा, जब से उन्होंने अपना अंदाज बदला है, तब से उन्हें तवज्जो मिलनी बढ़ गई है. एक वक्त ऐसा था कि वो जो भी बोलते थे, उसपर उनका मजाक उड़ता था. अब वो छवि काफी बदल गई है.

उनके कुछ पुराने बयान देखिए…

राजनीति हर जगह है. आपकी कमीज में है. आपकी पैंट में है. राजनीति हर जगह है.
सितंबर, 2010

हर एक आतंकी हमला रोकना बहुत मुश्किल काम है. हम 99 फीसदी आतंकवादी हमले रोक देंगे, लेकिन फिर भी एक फीसदी हमले हो ही जाएंगे.
नवंबर, 2011

मेरी मां मेरे कमरे में आईं. रोने लगीं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि सत्ता ज़हर है. 
जनवरी, 2013

ये कांग्रेस बड़ी अजीब पार्टी है. ये दुनिया का सबसे बड़ा राजनैतिक संगठन है, लेकिन इसका कोई नियम-कायदा नहीं है. हम हर दो मिनट में नए नियम बनाते हैं और फिर उसे कूड़ेदान में डाल देते हैं. कोई नहीं जानता कि पार्टी के क्या नियम हैं.
जनवरी, 2013

लोग हमें हाथी कहते हैं. हम हाथी नहीं हैं. हम मधुमक्खी का छत्ता हैं. ये मजेदार है, पर जरा सोचिए कि कौन ज्यादा ताकतवर है? हाथी या मधुमक्खी का छत्ता. 
अप्रैल, 2013

गरीबी तो एक मानसिक अवस्था है. इसका खाने-पीने, पैसे या बाकी सांसारिक सुविधाओं के अभाव से कोई लेना-देना नहीं है. अगर हमारे अंदर आत्मविश्वास हो तो हम गरीबी से उबर सकते हैं. 
अगस्त, 2013

मैं पार्टी संगठन में बदलाव करने के लिए पूरी कोशिश करने जा रहा हूं. मैं ये पक्का करूंगा कि बदलाव आए और मैं ये सब ऐसे करूंगा कि आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.
दिसंबर, 2013

विपक्ष बेचने की कला में माहिर है. उसके पास चमक, नाच-गाना सब है. वे गंजों को कंघियां बेच रहे हैं. अब वे उनके बाल काटने की कोशिश कर रहे हैं. 
जनवरी, 2014

हम विकास का ऐसा मॉडल लाएंगे कि जहां एक आदमी आकर आपकी तमाम परेशानियों को ठीक कर देगा. वो घोड़े पर सवार होकर आएगा. वही हमारा मॉडल होगा. वो ही भारत का मॉडल होगा. वो घोड़े पर सवार होकर आएगा. पीछे बैकग्राउंड में एक सूरज होगा. करोड़ों लोग इंतजार कर रहे हैं. वो आ रहा है और सबकुछ ठीक हो जाएगा. नहीं, ऐसे थोड़े न होती है चीजें. 
मार्च, 2014 (मोदी के गुजरात मॉडल पर ताना कसते हुए)

अब यहां से पढ़िए, चावल पुराना हो रहा है…

बीजेपी ने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बना डाला. 
अक्टूबर, 2017

ये चुनाव न PM मोदी के बारे में है और न मेरे बारे में. न ये बीजेपी के बारे में है और न ही कांग्रेस के बारे में. ये गुजरात के भविष्य का सवाल है. कल मैंने मोदी जी का भाषण सुना. 100 में से 90 बार तो मोदीजी बस मोदीजी के बारे में ही बोलते हैं.
दिसंबर, 2017

कहते थे देंगे जवाबदेह सरकार, किया लोकपाल क्यों दरकिनार?
GSPC, बिजली-मेट्रो घोटाले, शाह-जादा पर चुप्पी हर बार, 
मित्रों की जेब भरने को हैं बेकरार, लंबी है लिस्ट
और ‘मौनसाहब’ से है जवाब की दरकार
किसके अच्छे दिन के लिए बनाई सरकार?
दिसंबर, 2017

सवालों की लिस्ट बहुत लंबी है और हम बड़ी बेताबी से ‘मौन साहब’ (मोदी) के जवाबों का इंतजार कर रहे हैं. किसके अच्छे दिनों के लिए सरकार बनाई थी? 
दिसंबर, 2017

मोदी जी मेरे बारे में बुरे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. बेकार की बातें करते हैं. आज के अपने भाषण में भी उन्होंने ऐसा ही किया. मैं कांग्रेस और बीजेपी, दोनों के लोगों से कहना चाहता हूं कि राहुल गांधी, प्रधानमंत्री के पद का सम्मान करता है. PM मेरे बारे में चाहे कितने भी खराब शब्दों का इस्तेमाल करें, मगर राहुल गांधी उनके बारे में कुछ बुरा नहीं बोलेगा. 
दिसंबर, 2017

मोदी जी, हम बड़े प्यार से आपको गुजरात में हराएंगे. 
दिसंबर, 2017



Posted By:Admin






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