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पहले BA कहा, अब B.Com पार्ट वन पर क्यों अटक गईं स्मृति ईरानी?

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी राहुल गांधी के खिलाफ एक बार फिर अमेठी से चुनाव लड़ रही हैं. उन्होंने 11 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल किया. चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में ईरानी ने अपनी पढ़ाई लिखाई की जानकारी भी दी है. इसके साथ ही पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री की डिग्री का विवाद एक बार फिर सामने आ गया है. कांग्रेस ने ईरानी पर हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा,

 एक नया धारावाहिक आने वाला है. ‘क्योंकि मंत्री भी कभी ग्रेजुएट थीं’. ओपनिंग लाइन मैं बताती हूं क्या होगा. क्वालिफिकेशन के भी रूप बदलते हैं.नए नए सांचे में ढलते हैं. एक डिग्री आती है, एक डिग्री जाती है. बनते एफिडेविट नए हैं. जिस तरीके से स्मृति ईरानी जी ने अपने एफिडेविट में एजुकेशन सर्टिफिकेट को लेकर एक चीज कायम की है, कि किस तरीके से ग्रेजुएट से 12वीं कक्षा की हो जाती हैं. वो मोदी सरकार में ही मुमकिन है.

कांग्रेस के आरोपों का स्मृति ईरानी ने जवाब दिया. उन्होंने कहा,

कांग्रेस चाहे मुझे कितना भी अपमानित कर ले, लेकिन मुझे रोक नहीं सकती. मुझ पर हमला करना उनका अधिकार है, कांग्रेस के चेले-चपाटे चाहे जो भी कर लें, लेकिन वे मुझे नहीं रोक सकते हैं. वे जितना भी अपमानित करेंगे, मुझे उतनी ही ताकत मिलेगी कि मैं उनसे लड़ूं. मैं कांग्रेस पार्टी के नामदार के खिलाफ लड़ रही हूं इसलिए उनसे यह सब देखा नहीं जा रहा है.

क्या है डिग्री विवाद
#स्मृति ईरानी 2003 में बीजेपी में शामिल हुई थीं. उन्होंने 2004 में दिल्ली की चांदनी चौक से कांग्रेस के कपिल सिब्बल के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा था. उस समय के एफिडेविट में ईरानी ने अपनी शिक्षा को लेकर भी जानकारी दी थी. स्मृति ईरानी ने 1991 में सीबीएसई बोर्ड से 10वीं पास की. 1993 में उन्होंने सीबीएसई बोर्ड से ही 12वीं पास की. उन्होंने खुद को ग्रेजुएट बताया था. एफिडेविट के मुताबिक ईरानी ने 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कॉरेस्पोंडेंस से बीए किया था.

 

Smriti Irani education 2004

#2011 में स्मृति ईरानी गुजरात से राज्यसभा के लिए चुनी गईं. चुनाव आयोग को उन्होंने जो हलफनामा दिया. उन्होंने बताया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कॉरेस्पोंडेंस से 1994 में बी.कॉम पार्ट-1 किया है.

 

Smriti Irani education 2011 rajaya sabha

#2014 के लोकसभा चुनाव में ईरानी ने चुनाव आयोग को जो हलफनामा दिया था. उसमें बताया था कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 1994 में बैचलर्स ऑफ कॉमर्स पार्ट-1 किया है.

 

Smriti Iranieducation 2014

#2017 में ईरानी एक बार फिर राज्यसभा के लिए चुनी गईं.उन्होंने गुजरात से अपना पर्चा दाखिल किया था. आयोग को दिए एफिडेविट में उन्होंने बताया कि बैचलर्स ऑफ कॉमर्स पार्ट-1 (जो कि तीन साल का कोर्स है) पूरा नहीं किया है.

 

Smriti Irani education 2017 rajaya sabha

#2019 के एफिडेविट में बताया कि 1994 में उन्होंने बैचलर्स ऑफ कॉमर्स पार्ट-1 (जो कि तीन साल का कोर्स है) पूरा नहीं किया है.

 

Smriti Irani education 2019

2004 में दिए गए एफिडेविट में ईरानी ने बताया कि उन्होंने बीए किया है, लेकिन 2011 में उन्होंने जो हलफनामा दिया उसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने बी.कॉम पार्ट-1 किया था. 2014 में ईरानी ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 1994 में बैचलर्स ऑफ कॉमर्स पार्ट-1 किया है. 2004 में उन्होंने खुद को ग्रेजुएट बताया था. विवाद यही है कि ईरानी ग्रेजुएट हैं या नहीं. उन्होंने किस कोर्स की पढ़ाई की है.

2014 में इंडिया टुडे के कार्यक्रम में स्मृति ईरानी ने अपने डिग्री विवाद लेकर कुछ कहा था.

स्मृति ईरानी से सवाल पूछा गया,

2004 के एफिडेविट में आपने बताया था कि बीए किया है और आपके पास ग्रेजुएशन की डिग्री है.लेकिन 2014 के चुनाव में यह बीए पार्ट-1 हो गया. इसके पीछे रहस्य क्या है.

ईरानी ने कहा था,

लोग मुझे अनपढ़ कहते हैं. लेकिन मैं बता दूं कि मेरे पास येल यूनिवर्सिटी की भी डिग्री है. येल यूनिवर्सिटी ने मेरी लीडरशिप क्वालिटी को सेलिब्रेट किया था.

 

6 दिन के सर्टिफिकेट को बता दिया था येल की डिग्री
येल यूनिवर्सिटी की जिस डिग्री की बात ईरानी वीडियो में कर रही हैं, उसके बारे में खुद उन्होंने बाद में माना था कि ये ‘डिग्री’ वास्तव में एक सर्टिफिकेट था.जो कि उन सांसदों को मिला था जिन्होंने 6 दिन का ट्रेनिंग कोर्स किया था. ईरानी ने बताया था कि वह उन 11 सांसदों में शामिल थीं जो 2013 में क्रैश कोर्स के लिए येल यूनिवर्सिटी गए थे. यानी ईरानी ने सर्टिफिकेट को ही येल यूनिवर्सिटी की ओर से दी गई डिग्री बता दी थी. सच्चाई सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनका खूब मजाक उड़ाया था.

डिग्री और डिप्लोमा कोर्स होता क्या है.
#डिप्लोमा कोर्स:डिप्लोमा कोर्स आमतौर पर स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग पर फोकस करता है. 10वीं के बाद ही डिप्लोमा कोर्स किया जा सकता है. डिप्लोमा कोर्स आम तौर पर दो तरह का होता है.
ग्रेजुएट डिप्लोमा: इसे 10वीं या 12वीं के बाद किया जा सकता है.

पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा: पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है. आम तौर पर यह एक साल से लेकर तीन साल तक का कोर्स होता है.

डिग्री कोर्स: डिग्री को आमतौर डिप्लोमा से बेहतर माना जाता है. डिग्री हासिल करने के लिए किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला जरूरी है. 12वीं के बाद ही डिग्री कोर्स किया जा सकता है. डिग्री कोर्स 4 तरीके के होते हैं.
#बैचलर डिग्री: 12वीं के बाद इस डिग्री को हासिल किया जा सकता है. आमतौर पर यह कोर्स 3 से 4 साल का होता है.
मास्टर डिग्री: ग्रेजुएशन करने के बाद आप मास्टर डिग्री कर सकते हैं. यह पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री होती है. आम तौर पर यह कोर्स दो साल का होता है.
डॉक्टरेट डिग्री: हाईएस्ट लेवल की डिग्री होती है. जिसे मास्टर डिग्री के बाद कर सकते हैं. इस डिग्री को 4 से 7 साल में हासिल किया जा सकता है. पीएटडी पूरी करने के बाद डॉक्टरेट की उपाधि मिल जाती है.

भारत में चुनाव लड़ने के लिए किसी नेता या उम्मीदवार का शिक्षित होना जरूरी नहीं है. यह भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है कि बिना स्कूली शिक्षा हासिल किए हुए लोग भी चुनाव लड़ते हैं और जीत हासिल करते हैं. कोई कितना पढ़ा लिखा है ये मायने नहीं रखता. लेकिन भारतीय लोकतंत्र में एक वोटर को अपने उम्मीदवार के बारे में जानने का हक है. उम्मीदवारों की ओर से अपनी पढ़ाई लिखाई को लेकर अलग-अलग जानकारी देना न केवल कानूनी रूप से गलत है बल्कि नैतिक रूप से भी ठीक नहीं है.



Reported By:Admin
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