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ये दो चिट्ठियां देखकर मोदी खुश होंगे और राहुल गांधी के पसीने छूट जाएंगे!

कर्नाटक में कुछ तो सॉलिड चल रहा है. कर्नाटक में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. दोनों के नाम हैं- आर शंकर और एच नागेश. दोनों ने सपोर्ट वापस लेने की चिट्ठी राज्यपाल को भेज दी. इसके बावजूद कुमारस्वामी कूल बन रहे हैं. कह रहे हैं, सब बढ़िया हैं. इन दोनों विधायकों के सपोर्ट वापस लेने से उनकी सरकार को फिलहाल कोई नुकसान नहीं है. अगर जनता दल सेकुलर (JD S) या कांग्रेस के विधायक टूटते हैं, तब परेशानी होगी. ऐसी बातें भी हो रही हैं कि ये सारा ड्रामा बीजेपी और जनता दल सेकुलर की मिली-भगत से हो रहा है. इसके पीछे वजह है लोकसभा की सीटों का बंटवारा. JD (S) और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर मतभेद था. JD (S) 12 सीटें मांग रही थी. कांग्रेस 10 देने पर अड़ी थी.

ये एच नागेश की चिट्ठी.

ये सपोर्ट वापस लेने के लिए राज्यपाल को भेजी गई विधायक एच नागेश की चिट्ठी.

 

ये आर शंकर की भेजी चिट्ठी है.

ये आर शंकर की भेजी चिट्ठी है.

बीजेपी के विधायक हरियाणा में डेरा डाले बैठे हैं
इससे पहले ये हुआ था कि बीजेपी ने अपने 104 विधायकों को गुरुग्राम (गुड़गांव) बुला लिया. उन्हें गुरुग्राम के पास ITC ग्रैंड भारत होटल में रखा गया है. बीजेपी और कांग्रेस-JD (S) दोनों एक-दूसरे पर विधायक खरीदने का इल्ज़ाम लगा रही है. मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी कह रहे हैं कि बीजेपी ‘Operation lotus 3.0’ की फिराक में है. कि बीजेपी उनके विधायकों को अपनी तरफ मिलाकर सरकार गिराने की कोशिश कर रही है. बीजेपी का कहना है कि JDS-कांग्रेस उनके MLA तोड़ने में लगी है, मगर वो साथ हैं. उधर मेवात के होटल में ठहराए गए बीजेपी विधायक कह रहे हैं कि उन्हें लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए बुलाया और रोका गया है. कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए कम से कम 113 सीटें चाहिए. कांग्रेस और JD (S) गठबंधन के पास 118 विधायक हैं. बीजेपी के पास 104 MLA हैं.

मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने क्या कहा?
14 जनवरी को कुमारस्वामी ने येदियुरप्पा पर उंगली उठाते हुए कहा-

इसमें कोई शक नहीं कि ऑपरेशन लोटस 3.0 शुरू हो चुका है. बीजेपी हमारे विधायकों को अपनी तरफ मिलाने की पूरी कोशिश कर रही है. मुझे पता है कि विधायकों को कितने पैसे और क्या-क्या तोहफ़े देने की बात हुई है. मुझे ये भी पता है कि बीजेपी ने किनके नाम से मुंबई में कमरे बुक करवाए हैं.

कुछ कांग्रेस विधायकों के गायब होने की खबरें आ रही हैं. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का दावा है कि ये विधायक गायब नहीं हैं, बल्कि उन्हें बताकर मुंबई गए हैं. कुमारस्वामी का कहना है कि कांग्रेस के विधायक लगातार उनसे संपर्क में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और जेडीएस, दोनों के विधायकों को रिझाने की कोशिश कर रही है बीजेपी. CM ने बीजेपी के तीन नेताओं का नाम लेते हुए कहा-

14 जनवरी की शाम इन्होंने JD (S) के एक विधायक से संपर्क किया. 50 करोड़ रुपये, मंत्री का पद और इस्तीफ़ा देकर चुनाव लड़ने के वास्ते 30 करोड़ रुपये, ये सब ऑफर किया है. ये मत सोचिए कि मैं बीजेपी विधायकों से इस्तीफ़ा नहीं दिलवा सकता. मगर मैं अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल नहीं करना चाहता.

 

कांग्रेस क्या कह रही है?
कांग्रेस जमात के मुखिया सिद्धारमैया का कहना है कि उनके पाले में सब ठीक है और सारे विधायक साथ हैं. उधर कांग्रेस के ही जी परमेश्वर का कहना है कि उनके कुछ विधायक गायब हैं. वो कहां गए हैं, ये उन्हें मालूम नहीं. NDTV में माया शर्मा की एक रिपोर्ट छपी है. इसमें पांच विधायकों के नाम हैं. खबर के मुताबिक, ये पांचों गायब हैं. इनके नाम हैं- रमेश जरकिहोली, आनंद सिंह, बी नागेंद्र, उमेश जाधव और बी सी पाटिल. जरकिहोली को हाल में ही में कैबिनेट से हटाया गया था. 14 जनवरी को ख़बर चली कि कांग्रेस के तीन विधायक महाराष्ट्र में गायब हैं. बातें होने लगीं कि शायद ये टूट गए हैं. इसी कयासबाजी के बीच कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे का एक ट्वीट आया. उन्होंने लिखा कि वो मुंबई में हैं, लेकिन बीजेपी जॉइन करने की बात बकवास है. प्रियांक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे हैं.

येदियुरप्पा कांग्रेस-जेडीएस पर आरोप लगा रहे हैं
येदियुरप्पा ने इन आरोपों से इनकार किया. बोले, कांग्रेस उनके विधायकों को लालच देकर अपनी तरफ मिलाने की कोशिश कर रही है. लेकिन तमाम लालचों को अनदेखा कर बीजेपी विधायक साथ हैं.

ऑपरेशन लोटस चैप्टर 1
कुमारस्वामी और येदियुरप्पा के बीच पुरानी हिस्ट्री है. ‘ऑपरेशन लोटस’ उसी का एक हिस्सा है. फरवरी 2006 में कुमारस्वामी और बीजेपी के बीच एक समझौता हुआ. तय हुआ कि गठबंधन कर लेते हैं. 20-20 महीने के लिए कुमारस्वामी और येदियुरप्पा मुख्यमंत्री रहेंगे. अक्टूबर 2007 में जब येदियुरप्पा के CM बनने का टाइम आया, तो कुमारस्वामी मुकर गए. चुनाव में बीजेपी को 110 सीटें मिलीं. सरकार बनाने के लिए फिर भी तीन विधायक चाहिए थे. बीजेपी के पास पांच निर्दलीय विधायकों का सपोर्ट भी था.

मगर ये तो बिल्कुल मियाद पर रहने वाली बात थी. सो जोड़-तोड़ चलती रही. फिर क्या हुआ कि JD (S) के चार और कांग्रेस के तीन विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया. इन सबने दिसंबर 2008 में बीजेपी की तरफ से उपचुनाव लड़ा. सात सीटों में से पांच बीजेपी के पास आईं. इस तरह बीजेपी की सीटें बढ़कर हो गईं 115. ऊपर से पांच निर्दलीय विधायकों का सपोर्ट. इस्तीफ़ा दिलवाने से दल-बदल कानून भी चल नहीं पाया. इसी को कहते हैं ऑपरेशन लोटस.

ऑपरेशन लोटस चैप्टर 2
2018 में कर्नाटक चुनाव के बाद भी ऐसे ही जोड़-तोड़ चली. बीजेपी के पास 104 विधायक थे. सरकार बनाने के लिए उसे नौ और MLA चाहिए थे. नंबर नहीं होने के बावजूद बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया. राज्यपाल वजुभाई वाला ने बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दे दिया. ऐसा लग रहा था कि खुलेआम विधायक खरीदने का इंतज़ाम हो रहा है. स्थिति संभाली सुप्रीम कोर्ट ने. फैसला दिया, 48 घंटे में बहुमत साबित करो. बीजेपी की उम्मीदें टूट गईं. इसके बाद जाकर कांग्रेस और JD (S) की सरकार बनी. उस समय येदियुरप्पा और बीजेपी पर सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ करने का इल्ज़ाम लगा. विपक्ष का कहना था कि वो ‘ऑपरेशन लोटस 2.0’ अंज़ाम देने की कोशिश में हैं. अभी वाली उथल-पुथल उसी ऑपरेशन लोटस का एक्सटेंशन है. जिसमें बीजेपी और कांग्रेस-JD (S) दोनों ही एक-दूसरे पर खरीद-फ़रोख़्त का इल्ज़ाम लगा रहे हैं.

दल-बदल कानून क्या होता है?
संविधान के शेड्यूल 10 में इसका ज़िक्र है. अंग्रेजी में इसको कहते हैं- Anti-defection law. इसके मुताबिक, अगर कोई सांसद या विधायक अपनी पार्टी से अलग जाए, पार्टी से अलग जाकर वोट करे, तो उसे डिस्क्वॉलिफाई कर दिया जाएगा. ये कानून इसलिए बनाया गया था कि विधायकों-सांसदों की हॉर्स ट्रेडिंग न हो. पैसा, पोस्ट या कोई और लालच देकर सरकार बनाई और गिराई न जाए. मगर पार्टियां इसका भी तोड़ निकाल लेती हैं.



Reported By:Admin
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