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वित्तमंत्री पीयूष गोयल का बजट के दौरान 3 करोड़ का झूठ!

बजट पेश करने के दौरान वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने क्या एक गलत दावा कर दिया? या फिर इनकम टैक्स की तरह वित्तमंत्री ने यहां भी आंकड़ों का खेल कर दिया. या फिर सरकार जानबूझकर ये भ्रम बनाए रखना चाहती है. वित्तमंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि इनकम टैक्स छूट का दायरा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने से देश भर में 3 करोड़ कर दाताओं को फायदा होगा. जानकार लोग उनके इस दावे को गलत बता रहे हैं. जानकारों का कहना है कि इनकम टैक्स छूट सीमा 5 लाख रुपए तक करने से सिर्फ 55-60 लाख करदाताओं को सीधा फायदा पहुंचेगा. वित्तमंत्री का ये दावा गलत साबित हो सकता है.

वित्तमंत्री का  ऐलान क्या है?

वित्तमंत्री ने बजट भाषण के दौरान इनकम टैक्स पर एक बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अब 5 लाख रुपए तक की सालाना आमदनी वाले व्यक्तिगत करदाता इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रहेंगे. मतलब ये कि ऐसे टैक्सपेयर्स को जिनकी साल की आमदनी 5 लाख रुपए है, उन पर अब किसी तरह का इनकम टैक्स नहीं लगेगा. वित्तमंत्री के इस ऐलान को ज्यादातर टैक्सपेयर्स ने शुरुआत में यही समझा कि अब हरएक करदाता को इसका फायदा मिलेगा. मगर जैसे ही बजट के प्रपत्र संसद सार्वजनिक हुए. इसका खुलासा भी हो गया कि ये महज एक जुमला ही है. इस ऐलान के साथ ही कार्यवाहक वित्तमंत्री ने दावा किया कि सरकार के इस कदम से देश के 3 करोड़ व्यक्तिगत करदाताओं को लाभ मिलेगा. उनके इस दावे की भी लोगों ने चिंदी-चिंदी करनी शुरू कर दी. भाई लोगों ने खोजकर निकाला कि ऐसा कुछ नहीं है. जैसा वित्तमंत्री दावा कर रहे हैं. 5 लाख रुपए तक की आमदनी वाले करदाता ही इतने नहीं हैं, जितने वित्तमंत्री  बता रहे हैं.  तो इस रेंज में कितने करदाता आते हैं, इसका खुलासा भी थोड़ी देर में हो गया. पता चला कि इस रेंज में बमुश्किल 55-60 लाख करदाता आते हैं.

कितने करदाता हैं इस रेंज में?

एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट 2.5 लाख रुपए से 3.5 लाख रुपए तक के बीच के व्यक्तिगत करदाताओं की तादाद 30,09,390 है. इसके बाद 3.5 लाख रुपए से 4 लाख रुपए के बीच के करदाता 15,93,322 हैं. फिर 4 से 4.5 लाख रुपए तक की आमदनी वाले 16,86,545 टैक्सपेयर्स हैं. 4.5 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक का व्यक्तिगत रिटर्न दाखिल करने वाले 16,67,740 हैं. इस तरह 2.5 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक के बीच इनकम टैक्स फाइल करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या 79,56,998 होती है. इसमें भी 3.5 लाख रुपए तक की आमदनी वाले करदाताओं के लिए सरकार ने अलग कैटेगरी बना रखी है. बाकी तमाम करदाता अलग-अलग तरह के निवेश करके भी टैक्स बचा लेते हैं. ऐसे में जानकारों का कहना है कि सरकार की इस छूट का असल फायदा 55 से 60 लाख करदाताओं को ही मिल पाएगा.

जीरो से 2.5 लाख रुपए तक की आमदनी वाले करदाता टैक्स के दायरे से पहले ही बाहर हैं. अब अगर वित्तमंत्री ने इन टैक्सपेयर्स को भी अपने भाषण में जोड़ लिया हो बात अलग है. एक डेटा ये भी है. देश में 2 करोड़ 33 लाख 76 हजार 288 रिटर्न दाखिल करने वाले ऐसे हैं, जो रिटर्न तो भरते हैं लेकिन उन पर कोई टैक्स नहीं बनता है. माने कि इन लोगों की सालाना आमदनी 2.5 लाख से कम है. जाहिर है वित्तमंत्री ने ऐसे रिटर्न दाखिल करने वालों को भी अपने भाषण में शामिल कर लिया है.



Reported By:Admin
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