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प्रियंका गांधी कांग्रेस महासचिव बन गई हैं लेकिन चुनाव नहीं लड़ पाएंगी!

प्रियंका गांधी ट्विटर पर ट्रेंड हो रही हैं. टीवी पर छाई हुई हैं. सोशल मीडिया पर उनके बारे में बात हो रही है. सक्रिय राजनीति में उनकी एंट्री ने विरोधियों में खलबली मचा दी है. मजे की बात है कि लोकतांत्रिक पार्टी कांग्रेस में परिवारवाद अब भाई बहन मिलकर खत्म करेंगे. उससे भी ज्यादा मजे की बात ये है कि इस पर मजे वो ले रहे हैं जिन्होंने रामविलास पासवान के साथ गठबंधन कर रखा है. जिनका पूरा खानदान ही राजनीति में है. खैर, घर परिवार, जाति बिरादरी ये सब पॉलिटिक्स में चलता रहता है. आजकल जिसके बिना काम नहीं चलता वो है सोशल मीडिया. कुछ लोग तो सोशल मीडिया पर फोटोशॉप्ड तस्वीरें फैलाकर चुनाव जीत लेते हैं.

ट्विटर पर अभी के ट्रेंड्स

ट्विटर पर अभी के ट्रेंड्स

आपको लग रहा होगा कि हम हवा हवाई बात कर रहे हैं. बीजेपी में सोशल मीडिया को लेकर क्या स्ट्रेटजी है वो तो हमको नहीं पता लेकिन उसमें अकेले पीएम के तीन ट्विटर हैंडल बन रखे हैं. एक नरेंद्र मोदी, एक नरेंद्र मोदी डॉट इन और तीसरा पीएमओ इंडिया. तीनों वेरिफाइड. तो भैया सोशल मीडिया के फ्रंट पर बीजेपी कितनी एक्टिव है ये तो उनके सोशल मीडिया हेड से पूछो जो आए दिन अपने पुराने ट्वीट डिलीट करते रहते हैं.

 

modi on twitter

बस यहीं आकर प्रियंका गांधी की गाड़ी फंस जाती है, चक्का जाम हो जाता है. घर परिवार की बात मानकर पार्टी ने उनको महासचिव भले बना दिया हो. लेकिन इन अर्हताओं के बिना चुनाव नहीं लड़ने देगी. वो तो लोकसभा चुनाव है. यहां लोकल लेवल का चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस ने कुछ चीजें अनिवार्य कर रखी हैं. ये मध्य प्रदेश चुनाव के टाइम का लेटर देखो. इसमें लिखा गया था कि कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों, वर्तमान विधायकों और टिकट के दावेदारों का फेसबुक, ट्विटर पर अकाउंट होना चाहिए. सब पर एक्टिव होना चाहिए. फेसबुक पेज पर 15 हजार, ट्विटर पर 5 हजार फॉलोवर्स होने चाहिए. सबको व्हाट्सऐप पर एक्टिव होना चाहिए और मध्य प्रदेश कांग्रेस के ट्वीट सबको रिट्वीट करने हैं.

चिट्ठी

चिट्ठी

ये तब था जब विधानसभा चुनाव होने थे. इल्लू बिल्लू सब टिकट के लिए लाइन में थे और सबको ये करना था. अब तो लड़ाई आर पार की है. लोकतंत्र का सबसे बड़ा महोत्सव होने जा रहा है. महोत्सव वहोत्सव कुछ नहीं है बस कहने में थोड़ा कूल लगता है. चुनाव की बातें यहां कभी खतम नहीं होतें, बारहों मास कहीं न कहीं उत्सव चलता ही रहता है. खैर, प्रियंका गांधी की बात पर आते हैं. उनका कोई ऑफिशियल पेज नहीं है. ट्विटर हैंडल नहीं है. हैं तो बहुत सारे उनके नाम से लेकिन कोई वेरिफाइड नहीं है.

कोई नहीं है

कोई नहीं है

तो भैया ये बहुत बड़ा चैलेंज है प्रियंका के सामने. उनको जल्दी से जल्दी सोशल मीडिया पर लोग बिठाने होंगे. जल्दी से लाइक्स और फॉलोवर्स जोड़ने होंगे. रोज अपनी फैमिली के साथ इमोशनल फोटो डालनी होगी. memes डाल सकें तो बहुत अच्छा, आज का यूथ बहुत जल्दी कनेक्ट करता है मेमे से. हां, उनके साथ ये अच्छा रहेगा कि पुराने रायते वाले ट्वीट डिलीट नहीं करने पड़ेंगे. व्हाट्सऐप पर भी पार्टी वाले ग्रुप के अलावा फैमिली वाले ग्रुप में भी एक्टिव होना पड़ेगा. राहुल गांधी की रोज की मच मच उस ग्रुप में झेलनी पड़ेगी. लेकिन क्या करें? और कोई रास्ता भी तो नहीं है दोस्त. कांग्रेस के लोग परिवार के भक्त चाहे जित्ते बड़े हों, इस चीज से समझौता नहीं करेंगे. देख लेना.



Reported By:Admin
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