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फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाले की गिरफ़्तारी पर एमपी सरकार परेशान क्यों है?

23 जनवरी की शाम एक ख़बर आई. ख़बर ये कि 22 जनवरी को दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने मध्य प्रदेश के भोपाल से एक लड़के को गिरफ्तार किया. लड़के का नाम अभिषेक मिश्रा. न्यूज़ एजेंसी ANI की शुरुआती ख़बर के हिसाब से आरोप थे कि उसने सोशल नेट्वर्किंग साइट्स पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले पोस्ट किए थे. बाद में खबरें आईं कि अभिषेक ने राजनाथ सिंह के खिलाफ कुछ लिखा था. जिस कारण अभिषेक गिरफ्तार किया गया.

 

ANI

गिरफ्तारी का तरीका भी थोड़ा नौटंकी भरा था. पुलिस अभिषेक के घर ये कहकर घुसी कि वो AAP की तरफ से वेबसाइट बनवाने आये हैं. और फिर अभिषेक को गिरफ्तार कर ले गई.

अब यहां एक जरूरी बात. अभिषेक मिश्रा कोई ऐसा नाम नहीं है. जो पहली बार सुना गया हो. इस लड़के का ट्विटर पर वेरीफाइड अकाउंट है. वो खुले तौर पर बीजेपी की सरकारों के खिलाफ लिखता आया है और ज़ाहिर तौर पर कांग्रेस के नेताओं से उसकी नजदीकियां हैं. ये नजदीकियां विपक्ष के और भी नेताओं के साथ हैं. उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर एक नज़र मारते ही आपको अरविंद केजरीवाल, राज बब्बर, दिग्विजय सिंह, कमल नाथ जैसे नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें मिल जाएंगी.

फोटो - अभिषेक मिश्रा फेसबुक

फोटो – अभिषेक मिश्रा फेसबुक

खुद राहुल गांधी के साथ भी तस्वीरें मिल जाएंगी. भोपाल में रहने वाले छतरपुर के लड़के की नेताओं के बीच इस पूछ-परख का क्या कारण है? जवाब है. सोशल मीडिया.

पर सोशल मीडिया वाले पहलू की तरफ बढ़ने के पहले जान लीजिए कि इस गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?

जैसे ही गिरफ्तारी की खबरें आईं. मध्य प्रदेश सरकार हरकत में आ गई. सीएम कमल नाथ दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में थे. वहां से एमपी पुलिस को दिल्ली पुलिस से बात करने का आदेश दिया. एमपी के होम डिपार्टमेंट की तरफ से दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखी गई. आपत्ति दर्ज कराई गई. इस गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया. मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से केंद्र सरकार को चिट्ठी गई. खुद गृहमंत्री बाला बच्चन मीडिया के सामने आये. कहा, एमपी के नागरिक को दिल्ली की पुलिस ऐसे कैसे ले जा सकती है. ये सारा सरकारी टिटिम्मा हम आपको सिर्फ इसलिए बता रहे हैं ताकि आप समझ सकें कि एक गिरफ्तारी से एक प्रदेश के मुख्यमंत्री इतने बैचेन क्यों हो गए.

फोटो - अभिषेक मिश्रा फेसबुक

फोटो – अभिषेक मिश्रा फेसबुक

अब आते हैं मुख्य सवाल पर, कौन है अभिषेक मिश्रा. और वो क्यों इतना जरूरी हो गया कि कमल नाथ को उसकी फ़िक्र हो गई.

कांग्रेस वालों से पूछेंगे तो वो कहेंगे अभिषेक कांग्रेस के समर्थक हैं. अभिषेक की प्रोफाइल पर लिखा मिलेगा. News/Media Personality, RTI Activist.

 

Twitter

मीडिया के एक धड़े ने अभिषेक को कांग्रेस आईटी सेल का सदस्य बता रखा है. जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस आईटी सेल के प्रभारी अभय तिवारी की मानें तो अभिषेक न कांग्रेस का सदस्य है. और न आईटी सेल का सदस्य है. अभिषेक वायरल इन इंडिया नाम की वेबसाइट भी चलाते हैं. जो घनघोर रूप से फ़ेक न्यूज़ फैलाने के लिए कुख्यात है. ऐसी एक दो नहीं सैकड़ों तस्वीरे और आर्टिकल हैं. जो फ़र्जी हैं, लेकिन वायरल इन इंडिया ने उसे धड़ल्ले से चलाया. समय-समय पर वायरल इन इंडिया की फ़र्जी खबरें को पड़ताल हमने भी की हैं.

ऐसी फ़र्जी खबरें आती हैं वायरल इन इंडिया पर

ऐसी फ़र्जी खबरें आती हैं वायरल इन इंडिया पर

अभिषेक सबसे पहले 2016 में चर्चा में आया. 19 साल का लड़का, भोपाल के बंसल इंजीनियरिंग कॉलेज का स्टूडेंट. सिविल इंजीनियरिंग के तीसरे साल में पढ़ाई करता था. उस समय वो यूट्यूब पर वीडियो बनाया करता. उसका एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें वो केआरके को कथित तौर पर एक्सपोज कर रहा था. उसके छतरपुरिया उच्चारण ने लोगों का ध्यान खींचा, जिसके बाद उसके मोबाइल कंपनियों और जेएनयू की नारेबाजी पर बनाए वीडियो भी खूब वायरल हुए.

 

YOUTUBE SCREEN GRAB

धीरे-धीरे उसकी नजदीकियां नेताओं के साथ बढ़ीं. नेताओं के साथ तस्वीरें आने लगीं. और यहीं से झूठ का कारोबार भी शुरू हुआ. हल्ला तब मचा जब अभिषेक मिश्रा के कारण अरविन्द केजरीवाल झूठ फैलाते मिले. अभिषेक ने नोटबंदी के बाद पैसे न मिलने पर एक आदमी के बैंक में फांसी लगाने की फोटो पोस्ट कर दी. उसे अरविन्द केजरीवाल ने रीट्वीट कर दिया, बाद में पता लगा फ़र्जी फोटो है. बैंक के अंदर फांसी लगाने वाला बैंक लूटने आया था. अंदर फंस गया तो डर के मारे फांसी लगा ली.

 

Tweet

अभिषेक से जुड़ा एक कांड और है. जो यूट्यूबर ध्रुव राठी के दावे पर आधारित है. ध्रुव ने बीजेपी आईटी सेल के लिए काम करने वाले किसी महावीर खिलेरी से बात की. उस वीडियो के जरिये ध्रुव बीजेपी को कथित तौर पर एक्सपोज किया. जिसके बाद बीजेपी के आईटी सेल के लोगों की तरफ अभिषेक ने महावीर को पैसे ऑफर किए. सच-झूठ क्या था खुदा जाने.

 

तो कुल जमा अभिषेक कांग्रेस के फायदे के लिए काम करता था. अब कांग्रेस करवाती थी या नहीं करवाती थी, ये इफ और बट वाला मामला है. अभिषेक की वेबसाइट के जरिये खूब झूठ फैलाया जाता था. फिलहाल दिल्ली पुलिस ने उसे पकड़ लिया है. एमपी सरकार आरोप लगा रही है कि बीजेपी हार से बौखलाई है. इसलिए गिरफ्तारी का गलत तरीका चुना गया.

 

ABHISHEK 2

सवाल बीजेपी के लिए भी हैं, मीडिया में कहीं ये कहा गया कि धार्मिक भावनाएं भड़काने के लिए गिरफ्तारी हुई. कहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह का नाम आया तो कहीं ये कहा गया कि किसी महिला की शिकायत पर गिरफ्तारी हुई है. कांग्रेस अभिषेक के समर्थन में तो है. लेकिन कहीं भी ये कहने से बच रही है कि वो हमारी पार्टी का आदमी है.

Abhishek Mishra Facebook

Abhishek Mishra Facebook

यहां एक जरूरी बात, ये सब इंटरनेट पर बहुत हो रहा है. सोशल मीडिया पर थोड़ा सा भी एक्टिव हुए नए लोगों को पार्टियां आईटी सेल्स में भरती जाती हैं. आईटी सेल शब्द थोड़ा चमत्कारिक सा लगता है. इसलिए बार-बार दोहराया जाता है. बात वहां से आगे बढ़ गई है. अब नए बच्चों को वेबसाइट्स, यू-ट्यूब चैनल और फेसबुक पेज चलाने के बदले पैसे दिए जाते हैं. कुछ ये काम लगातार करते रहते हैं. कुछ चुनावों के समय. तीन-चार महीने की एक पूरी विंडो आती है. जब सच और झूठ फैलाने के लिए रंगरूटों की डिमांड बढ़ जाती है. इन लोगों के नाम कागजों पर नहीं आते, पार्टियां इन्हें अपना सदस्य नहीं मानतीं. और कभी कुछ गलत हो जाने पर सारी ज़िम्मेदारी इन्हीं के सिर आती है.

इस काम में शुरुआती पैसा एकमुश्त मिलता है इसलिए बच्चे इस तरफ खिंचते भी ज़्यादा हैं. अगर आप या आपका कोई जानने वाला भी इंटरनेट पर किसी नेता या पार्टी के लिए काम कर रहा हो या काम करने की तैयारी में हो तो एक दफा ये सोच ले कि कल को अगर सरकारें बदल जाएंगी, आपका नेता सत्ता से बाहर हो जाएगा तो आपका भविष्य क्या होगा?



Reported By:Admin
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