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शशि थरूर और ऑक्सफ़ोर्ड की सीक्रेट डील

मेरी साइंस स्ट्रीम रही है इसलिए इकोनॉमिक्स में हाथ बहुत तंग है. लेकिन फिर भी थोड़ा बहुत जो पता है उसके अनुसार अगर कार ज़्यादा बिकेंगी तो पेट्रोल भी ज़्यादा बिकेगा. पेंसिल ज़्यादा बिकेगी तो शार्पनर भी ज़्यादा बिकेंगे. सामानों के ये जोड़े कॉम्प्लेमेंट्री गुड्स कहलाते हैं.


क्या आपको पता है कि कॉम्प्लेमेंट्री गुड्स के उदाहरणों में एक और उदाहरण जुड़ा है. वो है – शशि थरूर की किताब और डिक्शनरी का. मने अगर शशि थरूर की किताब बिकेगी तो डिक्शनरियां भी खूब बिकेंगी. या अगर मार्केट में इंग्लिश टू हिंदी डिक्शनरी की बिक्री बढ़ी है तो ये सवाल पूछा जा सकता है कि क्या शशि थरूर की कोई नई बुक आई है?

यूं कोई बड़ी बात नहीं कि ऑक्सफ़ोर्ड जैसी डिक्शनरी छापने वाली कंपनियों ने शशि थरूर के साथ कोई सीक्रेट डील की हो. ऐसा क्यूं? ऐसा इसलिए क्यूंकि जब वो ट्विटर में, 280 (पहले 140) शब्दों के भीतर ही ‘ये बड़े-बड़े’ और डरावने अंग्रेजी के शब्द ठेल देते हैं तो उनकी किताब? – जब रात है इतनी मतवाली तो सुबह का आलम क्या होगा?

उस किताब को डिक्शनरी के बिना पढ़ना ऐसा ही है जैसे बिना हेलमेट के बाइक चलाना, जैसे बिना सीट बेल्ट के कार चलाना, जैसे नोटबंदी के बाद भी 500 के नोट चलाना.

ये वाले अंकल अगर शशि की पुस्तक पढ़ेंगे तो डिक्शनरी तो खरीदेंगे ही साथ ही में गूगल ट्रांसलेट भी खोल के रखेंगे. (तस्वीर: यू ट्यूब)

ये वाले अंकल अगर शशि की पुस्तक पढ़ेंगे तो डिक्शनरी तो खरीदेंगे ही साथ ही में गूगल ट्रांसलेट भी खोल के रखेंगे. (तस्वीर: यू ट्यूब)

सॉरी कैरिड अवे हो गया था, 500 ने नोट वाली एनॉलोजी को आप फ्लोक्सिनॉसिनिलीपिलीफिकेट कर सकते हैं. फ्लोक्सिनॉसिनिलीपिलीफिकेट मने किसी चीज़ को बकवास करार देना. फिर चाहे वो चीज़ सच में कैसी ही हो – बकवास या अच्छी या ओके-ओके.

और ये शब्द भी ज़रूर, थरूर के मुंह से ही सुना गया होगा. जी बिल्कुल. उन्होंने फ्लोक्सिनॉसिनिलीपिलीफिकेट के बदले फ्लोक्सिनॉसिनिलीपिलीफिकेशन का यूज़ किया था – Floccinaucinihilipilification. ट्वीट नीचे है ही. पढ़ लीजिए.

जी ट्वीट से समझ आ ही गया होगा कि उनकी नई किताब आ रही है – दी पैराडॉक्सियल प्राइम मिनिस्टर. मतलब विरोधाभासी प्रधानमंत्री. उसके प्रमोशन के लिए उन्होंने इस शब्द का उपयोग किया है. लेकिन ऐसा नहीं है कि वो पहली बार मुश्किल अंग्रेजी शब्दों का उपयोग करते हुए पकड़े गए हों. उनके बारे में ये कहा जाता है कि वो अंग्रेज़ी के पाणिनी बनने की राह पर हैं. उनका एक बहुचर्चित ट्वीट ये रहा.

इसका अर्थ? भाई हमसे अनुवाद न हो पाएगा!

खैर, फ्लोक्सिनॉसिनिलीपिलीफिकेशन डिक्शनरी का सबसे लंबा नॉन-टेक्निकल शब्द है. इसको कैसे प्रोननशिएट कैसे करना है? ऐसे –

टेक्निकल मने जो किसी स्पेसिफिक सब्जेक्ट से जुड़े होते हैं और उसी सब्जेक्ट के भीतर यूज़ होते हैं. जैसे किसी तत्व का आईयूपीएसी नाम टेक्निकल शब्द है क्यूंकि वो केवल ऑर्गनिक केमिस्ट्री में यूज़ होता है. किसी जीव का बोटनीकल नाम टेक्निकल शब्द है. तो बचे नॉन-टेक्निकल शब्द. मने वो शब्द जिनके लिए आपको किसी सब्जेक्ट की नॉलेज होने की ज़रूरत नहीं.

ट्रेन सिग्नल मने -लौहपथगामिनीसूचकदर्शकहरितताम्रलौहपट्टिका.

ट्रेन सिग्नल मने -लौहपथगामिनीसूचकदर्शकहरितताम्रलौहपट्टिका.

टेक्निकल शब्द आमतौर पर और भी लंबे होते हैं, इसलिए ही लंबे शब्दों में वो बाज़ी मार ले जाते हैं. जैसे अंग्रेजी का सबसे लंबा शब्द एक बीमारी का नाम है – न्युमोनोअल्ट्रामाइक्रोस्कोपिकसिलिकोवोल्केनोकोनियोसिस(Pneumonoultramicroscopicsilicovolcanoconiosis)

अच्छा बताइए ज़रा हिंदी का सबसे लंबा शब्द कौन सा है?

कुछ लोग कहते हैं लौहपथगामिनीसूचकदर्शकहरितताम्रलौहपट्टिका. लेकिन ये उत्तर गलत है. क्यूंकि ‘इटस अ मेड अप वर्ड’. मने ये मज़ाक के उद्देश्य से कुछ शरारती तत्वों ने बना दिया है. तो कई जगहों से वेरीफाई करने के बाद हमें पता लगा कि किंकर्तव्यविमूढ़ को हिंदी का सबसे लंबा शब्द होने का गौरव प्राप्त है. अगर आपको इससे लंबा कोई शब्द मिले तो बताइएगा.

वैसे संधियों के चलते हिंदी में काफी लंबे-लंबे शब्द बनाए जा सकते हैं. जिनका मूल संस्कृत होगा.

ये मारा अंकिल ने एक और शब्द – hippopotomonstrosesquipedaliophobia. हिप्पोपोटोमोंसट्रोसेसक्वीपेडालियोफोबिया. मने लंबे शब्दों से डर लगना.

तो अगर आपको हिप्पोपोटोमोंसट्रोसेसक्वीपेडालियोफोबिया नहीं है तो सबसे इंट्रेस्टिंग बात बताते हैं. गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार सभी भाषाओं में से दुनिया का सबसे लंबा शब्द एक संस्कृत शब्द है –

निरन्तरान्धकारित-दिगन्तर-कन्दलदमन्द-सुधारस-बिन्दु-सान्द्रतर-घनाघन-वृन्द-सन्देहकर-स्यन्दमान-मकरन्द-बिन्दु-बन्धुरतर-माकन्द-तरु-कुल-तल्प-कल्प-मृदुल-सिकता-जाल-जटिल-मूल-तल-मरुवक-मिलदलघु-लघु-लय-कलित-रमणीय-पानीय-शालिका-बालिका-करार-विन्द-गलन्तिका-गलदेला-लवङ्ग-पाटल-घनसार-कस्तूरिकातिसौरभ-मेदुर-लघुतर-मधुर-शीतलतर-सलिलधारा-निराकरिष्णु-तदीय-विमल-विलोचन-मयूख-रेखापसारित-पिपासायास-पथिक-लोकान्

और अंत में - किताब

और अंत में – किताब


# अंततः – कभी-कभी हमें कोफ़्त होती है कि ट्विटर के ‘वर्ड रिसट्रिकशन’ के चलते हम अपनी बात पूरी नहीं कह पाए. लेकिन शशि चाचा की दिक्कत सोचिए. कभी-कभी तो उन्हें ये कोफ़्त होती होगी कि वो अपना एक शब्द पूरा नहीं लिख पाए.


# नोट – आप लोगों को पता चल ही गया होगा ऊपर ‘शब्दों’ की जानकारी के अलावा बाकी सब बकवास था ह्यूमर क्रियेट करने के लिए था. जिसका सत्य से उतना ही लेना देना था जितना शशि थरूर का ‘भाई तुम साइन करते हो या नहीं’ वाले डायलॉग से. अब अगर डायलॉग वाला रेफरेंस समझ में आया हो तो बजाओ ताली वरना इसका फ्लोक्सिनॉसिनिलीपिलीफिकेशन कर दो.



Reported By:Admin
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