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कांग्रेस के पोस्टर पर जाति दिखी तो कोसा, पर यूपी में खुद वही कर रही बीजेपी!

बिहार की राजधानी पटना में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर कुछ दिनों पहले एक पोस्टर लगा मिला. इसमें कांग्रेस नेताओं की फोटो के आगे उनकी जाति लिखी थी. बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा के आगे ब्राह्मण तो बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के आगे राजपूत लिखा था. और इन दोनों के बीच बैठे थे स्वयं राहुल गांधी. उनके आगे लिखा था ब्राह्मण. इस पोस्टर की खबर जैसे ही बीजेपी और जेडीयू को लगी, उन्होंने फसड़ मचा दी. कांग्रेस को जातिवादी, षड्यंत्रकारी, बंटवारा करने वाला सब बता दिया. बताना भी चाहिए. इस तरह से जातियों को बताकर कांग्रेस समाज तोड़ने वाला ही काम कर रही है.

कांग्रेस के इस पोस्टर की जमके आलोचना हुई थी.

कांग्रेस के इस पोस्टर की जमके आलोचना हुई थी.

पर बिहार में बवाल करने वाली यही भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में खुद इससे चार कदम आगे निकल गई है. कांग्रेस को जातिवादी बतानी वाली बीजेपी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा उत्तर प्रदेश में जाति देखकर अपनी टीम बना रही है. हाल ही में भारतीय जनता युवा मोर्चा ने तमाम जिलों के अध्यक्ष घोषित किए थे. अब इन जिलाध्यक्षों को अपनी टीम बनानी थी. पर इन टीमों पर किस कदर जाति का फैक्टर हावी है, वो झांसी में खुलकर सामने आ गया है. भारतीय जनता युवा मोर्चा, झांसी महानगर की तरफ से जारी लेटर में टीम के हर सदस्य के आगे उसकी जाति लिखी हुई है. देखिए ये लेटर –

झांसी में बीजेपी युवा मोर्चा की टीम में जाति का कॉलम बना हुआ है.

झांसी में बीजेपी युवा मोर्चा की टीम में जाति का कॉलम बना हुआ है.

आपने इस लेटर में देखा कि कैसे इसे पांच खानों में बांटा गया है. पहला दायित्व, दूसरा नाम, तीसरा मंडल और चौथा कॉलम है जाति. इसमें पहला नाम लिखा है अंशुल गुप्ता का जिन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया है, उनके आगे मंडल का नाम शहर तो जाति वैश्य लिखी है. इसी तरह गौरव गोस्वामी के आगे गुसाईं. सुमित सिंह के आगे श्रत्रिय, रवि पाल के आगे गड़रिया, सौरभ बाजपेयी के आगे ब्राह्मण लिखा है…ऐसा ही हर नाम के आगे लिखा है.

लेटर में जिलाध्यक्ष और विधायक के साइन भी

इस लेटर में बाकायदा झांसी के विधायक, बीजेपी जिलाध्यक्ष और युवा मोर्चा के अध्यक्ष परमजीत सिंह का सिग्नेचर भी है. यानी 6 अक्टूबर को जारी ये लेटर एक आधिकारिक लेटर है. हमें ये लेटर सोशल मीडिया के जरिए मिला. इसे खूब शेयर किया जा रहा है. जाहिर है यहां बीजेपी वैसा ही फायदा लेना चाह रही है, जैसा कांग्रेस बिहार में लेना चाह रही है.

प्रदेश अध्यक्ष बोले – हमने हर वर्ग को लेने के लिए कहा है

हमने इस पर जब झांसी में युवा मोर्चा के अध्यक्ष परमजीत सिंह से बात की तो उनका कहना था ऊपर से जैसी व्यवस्था बताई गई है, वैसा किया जा रहा है. अगर इसमें कुछ गलत है तो माफी मांगते हैं. फिर वो अपना वही, सबका साथ सबका विकास वाला राग अलापने लगे. इस मामले में हमने बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यादव से भी बात की. उनका कहना था कि किसी को भी जाति के आधार पर टीम में लेने के लिए नहीं कहा गया है. हो सकता है वहां जिलाध्यक्ष ने अपनी समझ के लिए जातियां लिख ली हों. मगर ऐसा बिल्कुल नहीं कहा गया है कि यादव रख लो, कुर्मी रख लो, ठाकुर रख लो. हमने सभी वर्गों से लोग लेने को कहा है. लेटर में जाति क्यों लिखी, इसकी जांच करवा लेंगे.

सुभाष यदुवंश ने जाति लिखने के आरोपों पर सफाई दी.

सुभाष यदुवंश ने जाति लिखने पर कहा कि उनकी तरफ से ऐसा आदेश नहीं है.

चलिए नेता लोग तो सफाई देते रहेंगे. पर असल में होता यही है. हर पार्टी जब किसी चुनाव में टिकट बांटती है तो योग्यता से ज्यादा कैंडिडेट की जाति देखी जाती है. इलाके में कौन सी जाति के लोग हैं, ये देखकर टिकट फाइनल होते हैं. इसे समझने के लिए आम आदमी पार्टी का ही एक उदाहरण समझ लीजिए. उस पार्टी का जो साफ सुथरी राजनीति का वादा कर मैदान में आई थी. कुछ दिन पहले ही आप प्रवक्ता रहे आशुतोष ने खुलासा किया था कि जब उनको 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने चांदनी चौक से बतौर उम्मीदवार उतारा था, तब उन पर नाम के आगे सरनेम ‘गुप्ता’ लगाने का दबाव बनाया गया था. उन्होंने कहा था –

मेरे पत्रकारिता के 23 वर्षों के करियर में किसी ने मेरी जाति और सरनेम नहीं पूछा. सभी मुझे मेरे नाम से जानते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में जब मुझे आप के कार्यकर्ताओं से मिलवाया गया तो मेरे विरोध के बावजूद मेरे सरनेम का उल्लेख किया गया. बाद में मुझसे कहा कि सर आप जीतोगे कैसे, आपकी जाति के यहां काफी वोट हैं.

 

ashutosh

माने इस हमाम में सब नंगे हैं. कांग्रेस हो, बीजेपी हो या कोई और. सब जिसको जहां जैसे सहूलियत होती है, वैसे वहां जाति-धर्म का इस्तेमाल करती हैं. और लोग भी इनके चंगुल में फंस जाते हैं. कभी-कभी तो जान समझकर. वैसे भी जाति देखकर वोट देना इस देश में कोई नई बात नहीं है. पर ऐसे लोगों को समझना होगा कि वो ऐसा करके अपना ही नुकसान कर रहे हैं. क्योंकि राजनीतिक पार्टियां भी तभी सुधरेंगी, जब आप सुधरेंगे.



Reported By:Admin
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