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15 साल के लड़के को आतंकी बताकर मार डाला, 26 साल बाद बूढ़ी मां ने पुलिसवालों को जेल पहुंचाया

पंजाब का अमृतसर. यहां पल्हा नाम के गांव में 26 साल पहले पुलिस ने एक 15 साल के लड़के को घर से उठा लिया. लड़के का नाम था हरपाल सिंह जिसे 14 सितंबर 1992 को पुलिस थाने ले गई. चार दिन तक हवालात में रखा और फिर एक रात फेक पुलिस एनकाउंटर में उसे मार दिया.

तब से उस 15 साल के उस लड़के की मां हत्यारों को सजा दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ रही थी. 26 सितंबर को पंजाब के मोहाली में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने इस फेक एनकाउंटर मामले में अपना फैसला सुनाया है. इसमें थाने के पूर्व एसएचओ इंस्पेक्टर रघुबीर सिंह और सब इंस्पेक्टर दारा सिंह को उम्र कैद के साथ साथ 61-61 हजार का जुर्माना लगाया गया है. दोनों को आईपीसी की धारा 302 के तहत मर्डर का दोषी पाया गया है.

बलविंदर कौर ने 26 साल की लंबी लड़ाई लड़ी है.

बलविंदर कौर ने 26 साल की लंबी लड़ाई लड़ी है.

फैसले के बाद बलविंदर कौर कहती हैं,” मुझे आज भी याद है जब उस सुबह करीब चार बजे अचानक पुलिस वाले हमारे घर में घुस आए और बेटे हरपाल को बालों से घसीटते हुए घर से ले गए. हम लोग थाने गए तो हमें मिलने नहीं दिया गया. पांच दिन बाद अखबार में छपा कि आतंवादियों से हुई मुठभेड़ में हरपाल को मारा गया है. पुलिस ने उसे मार भी दिया और हमें लाश तक नहीं दी.”

पुलिस ने एक मनगढंत कहानी रची और कहा कि हरपाल और हरजिंदर ने पुलिस पर पैट्रोलिंग के दौरान फायरिंग की थी जिसके जवाब में पुलिस ने फायरिंग की और हरपाल मौके पर मारा गया. वहीं पुलिस ने ये भी कहा कि मौके से हरजिंदर भाग गया.” इसके 15 दिन बाद हरजिंदर को भी मार दिया गया था. हरपाल के केस को कोर्ट में लड़ रहे सतनाम सिंह बैंस ने ये भी कहा कि उस तथाकथित एनकाउंटर में न तो किसी पुलिसवाले को गोली लगी और न ही उस दौरान पुलिस की गाड़ी को किसी तरह का कोई नुकसान हुआ. साथ ही वकील ने ये भी कहा कि हरपाल को तीन मीटर की दूरी से दायीं आंख औऱ माथे पर गोली मारी गई थी.



Reported By:Admin
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