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मिशेल ओबामा ने कहा- कोई उम्मीद न पालें, अमेरिका को ‘बचाने’ कोई करिश्माई उम्मीदवार नहीं उतरेगा

लॉस एंजिलिस: मिशेल ओबामा ने अमेरिकी महिलाओं से गुजारिश की कि वे ऐसी कोई उम्मीद न पालें कि अमेरिका को ‘‘बचाने’’ के लिए कोई करिश्माई उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेगा. अपनी इस बात के साथ ही उन्होंने एक बार फिर साफ कर दिया कि राष्ट्रपति पद का दावेदार बनने की उनकी कोई योजना नहीं है जैसा कि अटकलें लगाई जा रही थीं. पूर्व प्रथम महिला (54) यूनाइटेड स्टेट ऑफ वीमेन समिट में शामिल हुईं थीं जहां उनका स्वागत किसी रॉकस्टार की तरह किया गया. इस सम्मेलन में करीब 5,000 लोग मौजूद थे जिनमें लगभग सभी महिलाएं थीं.

उन्होंने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन उम्मीदवारी की दौड़ में है.” मिशेल ने महिलाओं से अपील की कि वे जहां कहीं भी संभव हो घर पर, कार्यस्थल पर सब जगह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करें. उन्होंने कहा, “हमें बचाने के लिए हम किसी एक व्यक्ति का इंतजार नहीं कर सकते. हमने बराक ओबामा को चुना और लेकिन वह भी नस्लवाद नहीं खत्म कर पाए.” मिशेल ने उन युवा अमेरिकियों का भी शुक्रिया किया जो पार्कलैंड के एक हाई स्कूल में हुई गोलीबारी के बाद बंदूक से होने वाली हिंसा के खिलाफ खड़े हुए. 

मिशेल की 'स्कूल में भोजन योजना' पर ट्रंप ने लगाई थी रोक

 

आपको बता दें कि पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने स्कूलों में कम नमक, वसा और शक्कर वाले स्वास्थ्यवर्धक भोजन देने की पूर्व प्रथम महिला नागरिक मिशेल ओबामा की शुरू की गई एक योजना पर रोक लगा दी थी. कृषि विभाग ने एक बयान में कहा कि यह बदलाव अमेरिकी स्कूलों को व्यापक लचीलापन देगा और बच्चों को कम स्वादिष्ट भोजन को फेंकने से रोकेगा जो उन्हें इस योजना के लिए लेना जरूरी था. अमेरिकी बच्चों में मोटापे की समस्या से निपटने के लिए चल रही कोशिशों के बीच मिशेल की इस योजना को पुरजोर समर्थन मिला था जिसमें स्कूलों में सोडियम तथा मीठे दूध जैसे तत्वों पर रोक लगाई गयी थी.

इसके तहत बच्चों को भोजन में पूरी तरह खाद्यान्न से बनी वस्तुओं पर जोर दिया गया था. ट्रम्प प्रशासन ने योजना को बंद करने का फैसला ऐसे समय में लिया है जब एक स्टडी में यह बात सामने आई कि यदि अमेरिकी बच्चे ज्यादा से ज्यादा कसरत करें तो उनके पूरे जीवन में स्वास्थ्य संबंधी खर्च से हजारों करोड़ डॉलर की राशि बचाई जा सकती है. कृषि विभाग के अनुसार, पांच साल पहले स्कूलों में लागू की गई पोषाहार संबंधी अनिवार्यताओं की वजह से 1.2 अरब डॉलर की अधिक लागत लगी.



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