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PAK: नवाज शरीफ को अयोग्य ठहराने वाले SC न्यायाधीश के निवास पर फायरिंग

लाहौर: पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों की निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश इजाजुल अहसन के निवास पर अज्ञात बंदूकधारियों पर आज गोलियां चलायीं जिसकी व्यापक निंदा की गई. यहां मॉडल टाऊन में न्यायमूर्ति अहसन के निवास पर चलाई गई गोलियों से कोई हताहत नहीं हुआ. सुप्रीम कोर्ट के बयान के अनुसार तड़के साढ़े चार बजे और सुबह नौ बजे न्यायमूर्ति अहसन के निवास को निशाना बनाया गया. इस घटना के पश्चात पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश मियां साकिब निसार न्यायमूर्ति अहसन के घर गये और उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक आरिफ नवाज खान को तलब किया.

बयान के अनुसार प्रधान न्यायाधीश खुद ही स्थिति पर नजर रख रहे हैं. एक फोरेंसिक टीम सबूत इकट्ठा करने के लिए घटना स्थल पर पहुंच गई है. बैलेस्टिक विशेषज्ञ भी गोलीबारी की प्रकृति का पता लगाने के लिए बुलाये गये हैं. पुलिस अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि यह निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी या हवाई फायरिंग थी. 

 

पुलिस प्रवक्ता नियाब हैदर ने कहा, ‘‘ इलाइट फोर्स के कमांडो ने इलाके को घेर लिया है और जांच चल रही है.’’ उन्होंने कहा कि रेंजर्स न्यायमूर्ति अहसन के निवास पर तैनात किये गये हैं. प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी , पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ , पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो , सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन तथा लाहौर कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस घटना की निंदा की है.

प्रधानमंत्री ने संघीय और प्रांतीय अधिकारियों को आरोपियों को न्याय के कठघरे में लाने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति अहसन शीर्ष अदालत की उस पांच सदस्यीय पीठ के सदस्य थे जिसने पिछले साल अहम पनामागेट प्रकरण की सुनवाई की थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य ठहरा दिया था.  

नवाज शरीफ अब कभी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय के शुक्रवार (13 अप्रैल) को एक ऐतिहासिक फैसले के बाद देश के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जीवन भर पर किसी सार्वजनिक पद पर आसीन नहीं हो सकेंगे. ‘द डॉन’ की खबर के मुताबिक पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वमत से अपने फैसले में संविधान के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति को आजीवन के लिए अयोग्य ठहराया जाता है. संविधान के अनुच्छेद 62 (1)(एफ) के अनुसार सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति को निश्चित शर्तों के अनुसार अयोग्य ठहराया जाता है, लेकिन अयोग्यता की अवधि तय नहीं की गयी है.



Reported By:Admin
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