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शिक्षा के साथ दीक्षा के समन्वय से राष्ट्र निर्माण का दायित्व अदा करें युवाः मुख्यमंत्री

गुजरात के राज्यपाल श्री ओ.पी. कोहली ने युवा छात्रों का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान कौशल के जरिए राष्ट्र को नई वैश्विक ऊंचाइयों के पार ले जाने में संवाहक बनें। 

राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में शुक्रवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर में गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय (जीटीयू) का सातवां गौरवशाली दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। 

इस अवसर पर अभियांत्रिकी और प्रबंधन सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट के ४३०० से अधिक छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल ने १९८ उपाधिधारकों को उत्कृष्टता का स्वर्ण पदक भी प्रदान किया।  

युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने अनुरोध किया कि युवा शक्ति प्रतियोगिता के साथ संवेदनशीलता का भाव जगाकर समाज और राष्ट्र के लिए योगदान दे। 

श्री कोहली ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना में छात्र शक्ति की भूमिका अहम है। छात्र शक्ति को शिक्षा के आयुध से लैस होने के साथ ही ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों को भी विकास की कतार में लाने का दायित्व निभाना है। 

उन्होंने कहा कि जीटीयू ने शिक्षा के दायरे और समयानुकूल शिक्षा प्रणाली के परिप्रेक्ष्य में विश्व में नाम कमाया है, तब ऐसे विश्वविद्यालय के छात्र के रूप में अब समाज आपकी ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने कहा कि युवा छात्र शिक्षा-उपाधि के साथ-साथ दीक्षा और संस्कार का समन्वय साधकर समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए योगदान दें। 

स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर आयोजित जीटीयू के दीक्षांत समारोह को उपयुक्त करार देते हुए श्री रूपाणी ने युवाओं का आह्वान किया कि वे इसे नये भारत के निर्माण के लिए कमर कसने के अवसर के तौर पर लें। 

उन्होंने कहा कि इस दौर में सिर्फ शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है। समाज-दायित्व भाव के संस्कार और राष्ट्र तथा समाज के प्रति उपयोगी बनने की जागरूकता प्रत्येक युवा में होनी चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने एक प्रेरक पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा, 'निर्माणों के पावन युग में, हम चरित्र निर्माण न भूलें'। 

 

महात्मा मंदिर में जीटीयू का सातवां दीक्षांत समारोह संपन्न...                

 

मुख्यमंत्री ने गरीबी, बेरोजगारी सहित समाज की अन्य समस्याओं के निराकरण के लिए युवा छात्रों को विज्ञान एवं तकनीक के अधिकतम उपयोग की भी सीख दी। 

श्री रूपाणी ने कहा कि मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया जैसे नवीन अभियानों के माध्यम से प्रधानमंत्री भारतमाता को जगदगुरु बनाने को प्रतिबद्ध हैं और इसके मूल में युवा शक्ति निहित है। 

उन्होंने शुभकामनाएं दी कि नए विचार और नवोन्मेषण तथा अर्जित की गई ज्ञान-संपदा से उपलब्धि की नई छलांग लगाने को मिले इस अवसर से युवा छात्र मां भारती का नाम रोशन करेंगे। 

इस मौके पर अतिथि विशेष के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के वाइस चेयरमैन डॉ. एम.पी. पुनिया ने गौरवपूर्वक कहा कि जीटीयू के छात्र सिर्फ जीटीयू के नहीं बल्कि गांधी के गुजरात के युवा हैं। 

उन्होंने प्राध्यापकों से भी ईमानदारी, निष्ठा और जुनून के साथ सेवारत रहकर भारत के उत्तम भविष्य के निर्माता बनने का अनुरोध किया।  

डॉ. पुनिया ने छात्रों को समाज में पदार्पण कर व्यवसाय, अभ्यास और शिक्षा के त्रिवेणी संगम से टीमवर्क द्वारा भारतमाता की सेवा का संदेश दिया। 

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री भूपेन्द्रसिंह चूड़ास्मा भी उपस्थित थे। 

जीटीयू के कुलपति प्रो. डॉ. नवीन शेठ ने विश्वविद्यालय की वार्षिक गतिविधियों का ब्योरा वार्षिक रपट में प्रस्तुत किया। प्रारंभ में जीटीयू के रजिस्ट्रार डॉ. एस.डी. पंचाल ने सभी का स्वागत किया। 

कार्यक्रम में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं व उनके परिवारजनों के अलावा शिक्षाविद, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तथा उच्च शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती अंजू शर्मा, उच्च शिक्षा आयुक्त के.बी. उपाध्याय सहित आमंत्रित उपस्थित थे। 

 



Reported By:Jitendra J. dave
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